
रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
पतरातू डीजल कॉलोनी मैं डबल स्टोरी रेलवे आवास बना है और स्टाफ के नाम से अलॉटमेंट भी हो गया है लेकिन आज आवास का अलॉटमेंट तो कर दिया गया लेकिन इस आवास परिसर में इतना ज्यादा झाड़ियां और जंगली पौधे हैं कि लोगों को घर से निकलने में दिक्कत हो रहा है, कर्मचारी वरीय अनुभाग अभियंता (कार्य ) को बोलते बोलते थक गया लेकिन सफाई का कोई कार्यक्रम नहीं हुआ, बाद में कर्मचारी खुद अपना पैसा खर्च करके जेसीबी लगाकर सफाई का काम करवा रहा है, तथा इस कॉलोनी में लाइट का भी कोई व्यवस्था नहीं है, कर्मचारी खुद अपना पैसा से लाइट खरीद के लाया है,
लेकिन विद्युत विभाग के पास ना तो पोल है ना तार है. रात होते ही पूरा कॉलोनी अंधेरा हो जाता है, यहां की जानकारी उच्च अधिकारीयों तक है लेकिन कोई कुछ करना नहीं चाहता है, जहां रेलवे कर्मचारी रहता है वहां का साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए लेकिन अधिकारी नहीं करता है, इन लोगों का ध्यान सिर्फ रेलवे स्टेशन की तरफ है और रेलवे अधिकारी जहां रहता है वही का साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रहता है, नरक का जिंदगी जीने पर मजबूर है यह कर्मचारी, रेलवे कॉलोनी का रखरखाव का फंड तो जरूर आता है लेकिन इसका इस्तेमाल कहीं और कर लिया जाता है जिसके कारण रेलवे कॉलोनी की साफ सफाई और संपूर्ण रखरखाव पर कोई ध्यान अधिकारियों का नहीं रहता है. सारे अधिकारियों का मीली भगत है।
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