धार्मिक डेस्क: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा करने और रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसी विश्वास के चलते लोग खीर को रातभर चांदनी में रखते हैं और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा की 16 कलाओं को पूर्णता, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी विशेष रूप से शुभ होती है। कई स्थानों पर इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी की जाती है। ब्रज क्षेत्र में इसे रास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है।
मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर में अमृत जैसी दिव्य ऊर्जा समा जाती है। इसी विश्वास के साथ खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है और अगले दिन परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। यह धार्मिक और लोकपरंपरा का हिस्सा है; चांदनी में रखने से खीर में विशेष औषधीय गुण आ जाने का वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं है।
वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जा रही है। इस अवसर पर श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और परंपरा के अनुसार चांदनी में खीर रखते हैं।
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