रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान JSSC-CGL परीक्षा का मुद्दा एक बार फिर सदन में गूंजा। इस दौरान भाकपा (माले) के विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि जिस तरह अन्य मामलों में न्यायालय का सहारा लिया जाता है, उसी तरह JSSC-CGL विवाद के समाधान के लिए भी कोर्ट का सहारा लेकर रास्ता निकाला जाए।
विधायक ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असमंजस और नाराजगी का माहौल है। लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।
सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं के विश्वास की बहाली सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि कानूनी अड़चनें या विवाद समाधान में बाधा बन रहे हैं तो सरकार को न्यायालय की मदद लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
माले विधायक ने यह भी कहा कि लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ रही है। ऐसे में सरकार को जल्द ठोस कदम उठाकर युवाओं को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि उनके भविष्य के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
विधानसभा में JPSC-JSSC और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से भी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
गौरतलब है कि JSSC-CGL परीक्षा को लेकर राज्य में कई बार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे में सदन में उठी यह मांग सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव के रूप में देखी जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
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