रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों की गैरमौजूदगी पर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि “सवाल डालकर सदन में मौजूद नहीं रहना दुखद है।” स्पीकर की यह टिप्पणी प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति को लेकर आई।
अध्यक्ष ने कहा कि विधायक जनता की समस्याओं और मुद्दों को सदन में उठाने के लिए प्रश्न पूछते हैं, लेकिन जब संबंधित प्रश्न पर चर्चा और जवाब का समय आता है तो उनका सदन में मौजूद रहना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं और जवाबदेही से जुड़ा विषय बताया।
स्पीकर ने कहा कि प्रश्नकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से सरकार से जवाब मांगा जाता है और जनता के मुद्दों को सामने लाया जाता है। ऐसे में प्रश्न पूछने वाले सदस्य यदि सदन में उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसका उद्देश्य प्रभावित होता है।
उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही कहा कि विधानसभा की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। JPSC-JSSC विवाद, छात्र आंदोलन और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
स्पीकर की इस टिप्पणी के बाद सदन के भीतर विपक्षी विधायकों की भूमिका और उपस्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक हलकों में भी इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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