पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट

पाकुड़। लॉटरी की पर्ची भले छोटी हो, लेकिन इसके पीछे चलने वाले कथित कारोबार की चर्चा लाखों में है। कहीं 8 लाख, कहीं 2 लाख, कहीं 1.70 लाख तो कहीं 1 लाख रुपये की कथित मंथली—इन चर्चाओं ने पाकुड़ में एक बड़े सवाल को जन्म दे दिया है। दावा यह भी किया जा रहा है कि जिले में प्रतिदिन 50 लाख रुपये से अधिक का कथित लॉटरी कारोबार हो रहा है। अगर ये आंकड़े महज चर्चाएं हैं, तो फिर सवाल उठता है कि ऐसी चर्चाओं का आधार क्या है और कथित खेल आखिर संचालित कैसे हो रहा है?
शमीम के घर कथित छपाई, एक लाख अंसारी पर सप्लाई की चर्चा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कथित लॉटरी नेटवर्क में मनीरामपुर निवासी शमीम शेख का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि लॉटरी की पर्चियों की कथित छपाई शमीम शेख के घर पर होती है। वहीं, एक लाख अंसारी के जरिए कथित तौर पर पर्चियों की सप्लाई किए जाने की चर्चा है।
इसके अलावा बसीर शेख, रिबोन, फिटू और दुलाल के नाम भी कथित नेटवर्क से जोड़े जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
‘कोरोना वायरस’ की तरह फैल रहा कथित लॉटरी का खेल
स्थानीय लोगों की मानें तो कथित लॉटरी का खेल अब मकड़जाल की तरह फैलता जा रहा है। एक इलाके से दूसरे इलाके तक पहुंचती पर्चियों और बढ़ती गतिविधियों को लेकर लोगों में चिंता है।
सबसे बड़ा सवाल गरीब और दिहाड़ी मजदूर परिवारों को लेकर है। दिनभर पसीना बहाकर कमाई गई रकम अगर जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद में कथित लॉटरी में लग रही है, तो इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
कथित लॉटरी का यह खेल अगर इसी तरह फैलता रहा, तो आने वाले दिनों में इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।
लाखों की कथित मंथली—सच क्या है?
कहीं 8 लाख, कहीं 2 लाख, कहीं 1.70 लाख और कहीं 1 लाख रुपये की कथित मंथली की चर्चा आखिर किस आधार पर है? क्या वास्तव में इतना बड़ा आर्थिक लेन-देन हो रहा है या फिर यह सिर्फ स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाएं हैं?
अगर रकम का इतना बड़ा खेल नहीं है, तो फिर इन चर्चाओं की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? और अगर चर्चा में सच्चाई का कोई हिस्सा है, तो फिर कथित नेटवर्क की तह तक पहुंचना जरूरी है।
जनता पूछ रही है—आखिर कब रुकेगा यह खेल?
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि लॉटरी की पर्ची कौन बेच रहा है। सवाल यह है कि इसके पीछे कथित तौर पर कौन-कौन लोग जुड़े हैं और पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा है।
जनता के सवाल—
- शमीम शेख के घर कथित तौर पर पर्चियां छपने की चर्चा है तो इसकी जांच कब होगी?
- एक लाख अंसारी के जरिए कथित सप्लाई की बात कही जा रही है तो इसकी पड़ताल कब होगी?
- बसीर शेख, रिबोन, फिटू और दुलाल के नाम जिस कथित नेटवर्क से जोड़े जा रहे हैं, उसकी सच्चाई क्या है?
- लाखों रुपये की कथित मंथली की चर्चाओं में कितना सच है?
- जिले में प्रतिदिन 50 लाख रुपये से अधिक के कथित कारोबार की बात में कितनी वास्तविकता है?
- और सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब रुकेगा यह कथित लॉटरी का खेल?
अगर आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच से स्थिति साफ होनी चाहिए। वहीं, अगर जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो कथित नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल पाकुड़ की जनता की निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सीधा है—क्या गरीब परिवार यूं ही अपनी मेहनत की कमाई गंवाते रहेंगे या कथित लॉटरी के इस ‘मकड़जाल’ पर आखिरकार कार्रवाई का शिकंजा कसेगा?
Leave a comment