साइबर अपराध की दुनिया में ठगी के तरीकों के साथ-साथ अपराध से जुड़े हिसाब-किताब रखने के तरीके भी जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बन सकते हैं। साइबर ठगों के पास से बरामद रजिस्टर या लिखित रिकॉर्ड उनके नेटवर्क, लेन-देन और कथित ठगी से जुड़े मामलों की जानकारी सामने लाने में मदद कर सकते हैं।
जांच के दौरान यदि किसी संदिग्ध के पास से ऐसा रजिस्टर मिलता है, तो उसमें दर्ज नाम, मोबाइल नंबर, रकम और लेन-देन से जुड़ी प्रविष्टियों की पड़ताल की जा सकती है। इन जानकारियों का मिलान डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड से करने पर कथित साइबर ठगी के मामलों की कड़ियां जुड़ सकती हैं।
साइबर अपराध में कई बार अलग-अलग लोग विभिन्न भूमिकाओं में शामिल होने के संदेह में जांच के दायरे में आते हैं। ऐसे में लिखित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को यह समझने में मदद कर सकता है कि किन लोगों के बीच संपर्क था और पैसों का लेन-देन किस तरह हुआ। हालांकि, किसी रजिस्टर में नाम या नंबर दर्ज होने भर से किसी व्यक्ति का अपराध में शामिल होना साबित नहीं होता। इसकी पुष्टि अन्य साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
साइबर ठगी के मामलों में डिजिटल लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होते हैं। रजिस्टर में दर्ज जानकारियों की इन साक्ष्यों से तुलना करने पर जांच को दिशा मिल सकती है।
सावधानी जरूरी: अनजान लिंक पर क्लिक करने, किसी के साथ ओटीपी या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने और बिना पुष्टि के पैसे ट्रांसफर करने से बचें। साइबर ठगी होने पर तुरंत अपने बैंक और संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
नोट: किसी विशेष मामले में रजिस्टर की बरामदगी, उसमें दर्ज विवरण और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध होने पर खबर को तथ्यों के आधार पर और विस्तार दिया जा सकता है।
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