रांची। JPSC-JSSC मामले की जांच के बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांगते को लेकर गंभीर आरोप सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि CID की जांच से बचने के लिए उनके लैपटॉप और पेन ड्राइव से कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मिटाए गए।
मामले में जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर सकती है कि संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कौन-कौन से दस्तावेज या डेटा मौजूद थे और उन्हें कब तथा किस प्रक्रिया से हटाया गया।
यदि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जानबूझकर मिटाने की पुष्टि होती है, तो जांच के दौरान यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ऐसा किस उद्देश्य से किया गया और इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
जांच एजेंसियां डिजिटल उपकरणों, उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर सकती हैं।
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पहले से ही कथित अनियमितताओं और दस्तावेजों को लेकर जांच चल रही है। ऐसे में साक्ष्य मिटाने से जुड़े आरोप मामले को और गंभीर बना सकते हैं।
हालांकि, लैपटॉप और पेन ड्राइव से साक्ष्य मिटाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में सामने आने वाले डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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