रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पतरातू प्रखंड की पालू पंचायत स्थित डाडीडीह सरना उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य गहदम करमा झूमर प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी शामिल हुए। उन्होंने विधिवत फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया तथा आयोजन समिति, ग्रामवासियों, महिला-पुरुष कलाकारों, युवाओं एवं उपस्थित जनसमुदाय को सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों और करम गोसाईं की वंदना के साथ हुआ। पूरे परिसर में मांदर की गूंजती थाप, नगाड़ों की ताल, झूमर की मधुर लय और लोकगीतों की स्वर-लहरियों ने ऐसा सांस्कृतिक वातावरण निर्मित किया, जिसने झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत कर दिया। विभिन्न गांवों से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, अनुशासित प्रस्तुति और मनमोहक नृत्य के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत का शानदार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि मांदर की थाप में झारखंड की आत्मा बसती है और झूमर की लय में हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमिट छाप दिखाई देती है। करमा पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, भाईचारे, सामुदायिक एकता और हमारी लोक आस्था का महान उत्सव है। यह पर्व हमें जल, जंगल, जमीन और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा जितनी समृद्ध है, उतनी ही समृद्ध उसकी लोककला, लोकभाषा और सांस्कृतिक परंपराएं भी हैं। झूमर, करमा, छऊ, डोमकच और अन्य लोक विधाएं हमारी सभ्यता की अनमोल धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना समाज और सरकार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। यदि हमारी नई पीढ़ी अपनी भाषा, गीत, संगीत और लोक परंपराओं से जुड़ी रहेगी, तभी झारखंड की सांस्कृतिक अस्मिता और अधिक मजबूत होगी।
विधायक ने कलाकारों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी हुई कला को उचित मंच मिलना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देते हैं, बल्कि गांव-गांव में सामाजिक समरसता, आपसी प्रेम और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इतने भव्य और अनुशासित कार्यक्रम का आयोजन करना सराहनीय कार्य है।
उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनका सदैव प्रयास रहेगा कि विकास कार्यों के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास को भी समान महत्व मिले। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जितने आवश्यक हैं, उतना ही आवश्यक अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी है। क्योंकि जिस समाज की जड़ें अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़ी होती हैं, उसका भविष्य सदैव मजबूत और गौरवशाली होता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमुदाय ने पारंपरिक करमा झूमर की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। कलाकारों की कदमताल, मांदर की गूंज और लोकगीतों की मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को उल्लास, ऊर्जा और सांस्कृतिक गौरव से भर दिया। महिलाओं और युवतियों की पारंपरिक पोशाकों के साथ प्रस्तुत झूमर नृत्य तथा पुरुष कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विधायक श्री चौधरी ने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत केवल पुस्तकों में सुरक्षित रखने की वस्तु नहीं है, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को भी अपनाएं तथा अपने गांव और समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
समारोह के अंत में विधायक ने सभी प्रतिभागी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति, विद्यालय परिवार और पालू पंचायत के ग्रामीणों को धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भविष्य में भी निरंतर होते रहने चाहिए, ताकि झारखंड की लोक संस्कृति सदैव जीवंत और समृद्ध बनी रहे।
“मांदर की थाप यूं ही गूंजती रहे, झूमर की लय यूं ही थिरकती रहे और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत सदैव नई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहे।”
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