हिरणपुर/पाकुड़। पाकुड़ जिले में कथित अवैध लॉटरी के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के दावों में शमीम शेख का नाम कथित रूप से लॉटरी टिकटों की छपाई से, जबकि हृदय मंडल और अमित साहा के नाम कथित सप्लाई नेटवर्क से जोड़े जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना बाकी है।
छपाई से सप्लाई तक कथित नेटवर्क का दावा
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कथित तौर पर तैयार किए जाने वाले लॉटरी टिकट अथवा नंबर अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाए जाते हैं। हिरणपुर सहित जिले के अन्य इलाकों में मोबाइल और व्हाट्सऐप के माध्यम से पांच अंकों वाले “चॉइस” और “ओके” नंबरों के कथित खेल की भी चर्चा है।
यदि इन दावों में तथ्य है, तो मामला केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा नंबर बेचने तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि छपाई, सप्लाई, वितरण और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी की जांच का विषय बनता है।
गरीब परिवारों की कमाई पर असर की चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि कथित लॉटरी गतिविधियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोग भी पैसा लगा रहे हैं। लोगों की चिंता है कि ऐसी गतिविधियों में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाली कमाई खर्च होने से परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि प्रशासन कथित गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि वास्तव में कौन लोग इसमें शामिल हैं और इसका संचालन किस स्तर तक फैला हुआ है।
प्रशासन के सामने सीधे सवाल
अगर कथित लॉटरी नेटवर्क सक्रिय है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसकी छपाई कहां होती है, सप्लाई कौन करता है, नंबर कहां से जारी होते हैं और रकम का लेन-देन किस माध्यम से होता है?
अब कार्रवाई का इंतजार
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए नाम सामने आने वाले लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। लेकिन यदि जांच में अवैध लॉटरी संचालन की पुष्टि होती है, तो कानून के तहत जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल प्रशासन और पुलिस से है—कथित लॉटरी नेटवर्क की जांच कब शुरू होगी? छपाई और सप्लाई की कथित कड़ी तक जांच कब पहुंचेगी? और यदि कोई संगठित नेटवर्क सामने आता है तो उसके खिलाफ कब कार्रवाई होगी?
इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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