झारखंड। बंद हो चुकी कोयला खदानों की जमीन को दोबारा उपयोग में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। योजना के तहत ऐसी जमीनों पर ऊर्जा उत्पादन, पर्यटन और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।
इस पहल के प्रथम चरण में गिरिडीह और करमा OCP का चयन किए जाने की जानकारी सामने आई है। खनन बंद होने के बाद खाली पड़ी जमीन को उपयोगी बनाने के लिए अलग-अलग संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।
योजना के तहत खदान क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध जमीन के अनुसार अलग-अलग परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे खाली पड़ी जमीन का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
कृषि योग्य जमीन पर खेती को बढ़ावा देने, उपयुक्त क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां विकसित करने और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।
अधिकारियों के स्तर पर चयनित खदानों की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद परियोजनाओं को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।
फिलहाल गिरिडीह और करमा OCP से इस पहल की शुरुआत की तैयारी है। आने वाले समय में अन्य बंद कोयला खदानों को भी इस योजना में शामिल किए जाने की संभावना है।
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