झारखंड : झारखंड अलग राज्य बनने के 21 साल बाद 2021 में झारखंड स्वावलंबी सहकारी समितियां अधिकरण का गठन हुआ। लेकिन इस अधिकरण का दुर्भाग्य है कि अब 33 माह से यह हेडलेस है। इसका कोई चेयरमैन नहीं है। ट्रिब्युनल के पहले चेयरमैन कुमार गणेश दत्त का 21 अक्तूबर 2022 को कार्यकाल पूरा हो गया। उसके बाद से यह ट्रिब्युनल अपने चेयरमैन के आने की प्रतीक्षा कर रहा है। यहां न सहकारी समितियों की समस्याएं सुलझायी जा रही है। न प्राप्त शिकायतों पर कोई सुनवाई हो रही है। अभिकरण का कार्यालय प्रतिदिन खुलता अवश्य है। वहां प्रतिनियुक्त व पदस्थापित कनीय अधिकारी व कर्मी जरूर आते हैं। सुरक्षा में भी होमगार्ड के जवान प्रतिनियुक्त हैं। लेकिन अभिकरण अपना मूल काम ही नहीं कर रहा है। इस अभिकरण का गठन सहकारी समितियों की समस्याओं, विवादों, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े विवादों पर फैसले के लिए किया गया था।
जिला न्यायाधीश के पद से रिटायर कुमार गणेश दत्त को इसका पहला चेयरमैन बनाया गया था। 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद कुमार गणेश दत्त का कार्यकाल पूरा हो गया। उसके बाद कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने तीन रिटायर आईएएस अधिकारियों के नाम भी चेयरमैन पद के लिए बढ़ाया। लेकिन लगभग ढाई साल से सरकार ने चेयमैन की नियुक्ति का मामला खटाई में डाल दिया। जानकारी के अनुसार चेयमैन के नहीं रहने की वजह से यहां सैंकड़ों की संख्या में आवेदन और याचिका लंबित पड़े हैं। सहकारी व स्वावलंबी समितियों से जुड़े निबंधन, निर्वाचन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उनका निबटारा नहीं हो रहा है। विसंगतियों और गड़बड़ियों का लाभ उठा कर सहकारी व स्वावलंबी समितियां और उसके सदस्य जमकर लाभ उठाते जा रहे हैं। कृषि विभाग से जुड़े इस ट्रिब्युनल को सक्रिय करने की दिशा में विभाग ने भी अपना उतावलापन त्याग दिया है।
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