
पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट

पाकुड़।
रविवार का दिन पुलिस केंद्र पाकुड़ के लिए खास और ऐतिहासिक बन गया, जब शहीद अमरजीत बलिहार स्टेडियम में क्रिकेट का ऐसा रोमांच देखने को मिला कि मानो पूरा पाकुड़ ही खेल के रंग में डूब गया हो। अवसर था SDPO पाकुड़ और SDPO महेशपुर टीमों के बीच आयोजित फ्रेंडली क्रिकेट मैच का, लेकिन मैदान पर जोश, जज़्बा और प्रतिस्पर्धा किसी बड़े टूर्नामेंट से कम नहीं थी।

इस मैत्रीपूर्ण मुकाबले का मुख्य उद्देश्य पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के बीच आपसी सौहार्द, टीम भावना, अनुशासन और खेल भावना को मजबूत करना था। सुबह से ही स्टेडियम में उत्साह का माहौल था। वर्दी में खिलाड़ी, तालियों से गूंजता मैदान और हर रन पर बढ़ता रोमांच—हर पल यादगार बनता चला गया।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी SDPO महेशपुर की टीम ने संयम और संघर्ष के साथ खेलते हुए निर्धारित 12 ओवर में 61 रन बनाए। पाकुड़ की गेंदबाज़ी इकाई ने सधी हुई लाइन-लेंथ और कसी हुई फील्डिंग का शानदार नमूना पेश किया, जिससे रन बनाना आसान नहीं रहा। दर्शकों को हर ओवर में विकेट और रन के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी SDPO पाकुड़ की टीम ने मैदान पर कदम रखते ही आक्रामक तेवर दिखाए। शुरुआती ओवरों से ही चौके-छक्कों की बरसात शुरू हो गई। बल्लेबाज़ों की शानदार टाइमिंग और आत्मविश्वास ने मैच का रुख पल भर में बदल दिया। नतीजा यह रहा कि SDPO पाकुड़ की टीम ने मात्र छठे ओवर में 62 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया, और स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मैच समाप्त होते ही जीत का जश्न पूरे मैदान में छा गया। इसके बाद आयोजित सम्मान समारोह में पुलिस अधीक्षक पाकुड़ ने दोनों टीमों को कप प्रदान कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेलकूद न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक मजबूती, कार्य क्षमता और टीमवर्क को भी नई ऊर्जा देता है। पुलिस बल जैसे अनुशासित संगठन के लिए खेल गतिविधियां बेहद आवश्यक हैं, क्योंकि इससे तनाव कम होता है और आपसी समन्वय बढ़ता है।
पूरे आयोजन के दौरान खेल भावना, अनुशासन और भाईचारे का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। हार-जीत से ऊपर उठकर खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया और मैत्रीपूर्ण माहौल में मैच का आनंद लिया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि पुलिस बल सिर्फ कानून-व्यवस्था का प्रहरी ही नहीं, बल्कि खेल और सकारात्मक गतिविधियों में भी आगे है।
कुल मिलाकर यह फ्रेंडली क्रिकेट मैच केवल एक खेल नहीं, बल्कि पुलिस परिवार की एकता, जोश और जज़्बे का उत्सव बन गया। वर्दीधारियों के बल्ले-गेंद की गूंज ने ऐसा समां बांधा कि सचमुच कहा जा सकता है—उस दिन क्रिकेट ने नहीं, जज़्बे ने खेला और पूरा पाकुड़ हिल उठा

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