जामताड़ा। हूल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री Champai Soren ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आज फिर एक नई ‘हूल’ क्रांति की आवश्यकता है। उन्होंने सिद्धो-कान्हू सहित संथाल हूल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया।
चंपई सोरेन ने कहा कि हूल केवल एक विद्रोह नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपने प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने हूल आंदोलन के इतिहास और उसके सामाजिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
इस दौरान शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी हूल आंदोलन की विरासत को याद किया गया।
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