नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान कई यात्रियों के मन में सवाल रहता है कि क्या वे अपनी आवंटित सीट या बर्थ बदल सकते हैं। रेलवे की व्यवस्था के अनुसार, टिकट पर दर्ज सीट या बर्थ यात्री को आवंटित होती है। बिना अनुमति किसी दूसरे यात्री की सीट पर कब्जा करना उचित नहीं है।
अगर दो यात्री आपसी सहमति से सीट बदलना चाहते हैं, तो विवाद की स्थिति से बचने के लिए ट्रेन में मौजूद टीटीई/अधिकृत रेलवे कर्मचारी से बात करना बेहतर है। खाली बर्थ होने पर उसका आवंटन भी रेलवे के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आरक्षित सीट पर किसी दूसरे यात्री के अधिकार को बिना सहमति प्रभावित नहीं किया जा सकता। सीट या बर्थ को लेकर समस्या होने पर रेलवे के आधिकारिक सहायता तंत्र RailMadad का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसलिए सफर के दौरान सीट बदलने की जरूरत हो तो पहले संबंधित यात्री की सहमति लें और जरूरत पड़ने पर टीटीई से अनुमति या मार्गदर्शन प्राप्त करें। इससे यात्रा के दौरान अनावश्यक विवाद से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष: अपनी मर्जी से किसी की आरक्षित सीट पर बैठना सही नहीं है। सीट बदलने के लिए आपसी सहमति और रेलवे स्टाफ की मदद लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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