
पाकुड़ ब्यूरो जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
पाकुड़/महेशपुर। महेशपुर प्रखंड के शहरग्राम गांव में संचालित “गुरु शिष्य स्टोन वर्क” क्रेशर को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, क्रेशर के रात के समय संचालन की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि देर रात तक मशीनों के चलने की आवाज सुनाई देती है। इसको लेकर ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्रेशर संचालन को लेकर पहले भी स्थानीय स्तर पर चर्चा होती रही है। बताया जा रहा है कि अंचल अधिकारी की ओर से रात के समय क्रेशर का संचालन नहीं करने की बात कही गई थी। ऐसे में यदि रात में मशीनों के संचालन की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह जांच का विषय है कि निर्धारित निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं और संबंधित विभाग की ओर से इसकी नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही है।
रात में मशीन चलने की शिकायत से उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के मुकाबले रात में क्रेशर क्षेत्र में गतिविधियां होने की शिकायत कई बार सामने आती रही है। ग्रामीणों का दावा है कि देर रात मशीनों की आवाज सुनाई देती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में पूरे मामले में मौके पर प्रशासनिक निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि जांच के दौरान निर्धारित समय के विपरीत क्रेशर का संचालन पाया जाता है, तो संबंधित विभाग को यह देखना होगा कि संचालन की अनुमति, पर्यावरणीय शर्तों और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
भारी वाहनों और कथित ओवरलोडिंग पर भी सवाल
क्रेशर से जुड़े भारी वाहनों के आवागमन को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर से निकलने वाले कुछ भारी वाहनों में कथित रूप से क्षमता से अधिक सामग्री लोड किए जाने की आशंका है।
यदि ओवरलोडिंग की शिकायत सामने आती है तो इसकी जांच संबंधित परिवहन एवं खनन विभाग द्वारा वाहन के दस्तावेज, वजन, परिवहन से जुड़े वैध कागजात तथा लागू नियमों के आधार पर की जा सकती है। केवल शिकायत के आधार पर किसी वाहन या संचालक को दोषी नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति अधिकृत जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
धूल और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में चिंता
क्रेशर क्षेत्र से निकलने वाली धूल को लेकर भी आसपास के ग्रामीणों ने चिंता जताई है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर संचालन के दौरान उड़ने वाली धूल आसपास के घरों और खेतों तक पहुंचती है।
किसानों ने आशंका जताई है कि यदि लंबे समय तक धूल का प्रभाव बना रहता है, तो इसका फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, फसलों या पर्यावरण पर वास्तविक प्रभाव का आकलन वैज्ञानिक या विभागीय जांच के माध्यम से ही किया जा सकता है।
ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा स्थल निरीक्षण के साथ-साथ धूल नियंत्रण की व्यवस्था, पानी का छिड़काव, वाहनों के आवागमन, सामग्री के भंडारण तथा संबंधित पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन की जांच की जा सकती है।
क्या नियमों के अनुसार हो रहा है क्रेशर का संचालन?
क्रशर इकाई के संचालन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित इकाई के पास आवश्यक वैध स्वीकृतियां और अनुमतियां मौजूद हैं या नहीं तथा संचालन के दौरान निर्धारित शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
प्रशासनिक जांच में आवश्यकता के अनुसार क्रशर से संबंधित दस्तावेज, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रमाण-पत्र/अनुमतियां, खनन एवं परिवहन से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य लागू शर्तों की जांच की जा सकती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो सक्षम विभाग द्वारा लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायत सही है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात में क्रेशर संचालन की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित निर्देशों के बावजूद संचालन कैसे हुआ। वहीं, यदि ओवरलोडिंग या प्रदूषण संबंधी शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं, तो संबंधित जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन केवल कागजी स्तर पर नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण करे। ग्रामीणों के अनुसार दिन के समय निरीक्षण के बजाय अलग-अलग समय पर जांच होने से वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल रात में क्रेशर संचालन, कथित ओवरलोडिंग और प्रदूषण संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक एवं तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
वहीं, इस रिपोर्ट के तैयार होने तक “गुरु शिष्य स्टोन वर्क” क्रेशर संचालक का पक्ष सामने नहीं आया है। संचालक की ओर से यदि कोई स्पष्टीकरण या दस्तावेज उपलब्ध कराया जाता है, तो निष्पक्ष पत्रकारिता के तहत उसका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
शहरग्राम में क्रेशर संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग मौके पर जाकर क्रेशर के संचालन का निरीक्षण करेगा? क्या निर्धारित समय और संचालन संबंधी शर्तों की जांच होगी? क्या भारी वाहनों और कथित ओवरलोडिंग की जांच की जाएगी? क्या धूल और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का भौतिक सत्यापन होगा?
यदि जांच में सभी दस्तावेज और संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो शिकायतों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो सक्षम विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल शिकायत, जांच और कार्रवाई—इन तीनों के बीच प्रशासनिक जांच ही वह कड़ी है, जिससे शहरग्राम के गुरु शिष्य स्टोन वर्क क्रेशर को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
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