तमाड़। तमाड़ प्रखंड के जादोडीह, मारधान स्थित मैदान में पुरान जनजातीय समाज की ओर से गोम्हा संगे करम मिलानोर समारोह का आयोजन किया गया। इसमें पुरान जनजाति के लगभग 70 गांवों के लोग शामिल हुए। पुरुषों, महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी से पूरा मैदान पारंपरिक रंग में रंग गया। कई गांवों से लोग टेंपो, सवारी गाड़ियों और बसों से पहुंचे। भीड़ इतनी अधिक थी कि विशाल मैदान में भी जगह कम पड़ गई।

समारोह में अतिथियों का स्वागत कांसे की थाली और लोटा पानी देकर पारंपरिक तरीके से किया गया। स्वागत के बाद गोम्हा पूजा को पारंपरिक रूप से किया गया। इसके बाद करम राजा को अखाड़े में लाया गया।
करम राजा की पूजा – अर्चना पाहन के द्वारा विधिवत से किया गया। अखाड़ा बंधन गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पुरान विकास समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पारंपरिक नृत्य-गीत प्रस्तुत कर समारोह को आगे बढ़ाया।
पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोकगीतों ने बांधा समां :
कार्यक्रम में अरुण पुरान ने गोम्हा परब के इतिहास और महत्व की जानकारी दी। वहीं, सीतानाथ मांझी और अशोक पुरान ने करम परब की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला। इसके बाद लोगों ने पारंपरिक भादर गीतों पर नृत्य किया और गीत गाकर अपनी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया। पूजा-पाठ, अखाड़ा बंधन और सामूहिक नृत्य के माध्यम से पुरान समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिली।

समाज की एकजुटता पर दिया जोर :
समारोह के अध्यक्ष बांका बाउरी पुरान ने कार्यक्रम में शामिल महिलाओं, युवाओं और समाज के सभी लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को इसी तरह बढ़-चढ़कर अपने पारंपरिक पर्व-त्योहारों में भाग लेना चाहिए। इससे सामाजिक एकता मजबूत होगी और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी संस्कृति और परंपराओं को पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका :

कार्यक्रम का संचालन दुलाल, पवन और रूप सिंह ने किया। आयोजन को सफल बनाने में पुरान विकास समिति के अध्यक्ष दुबराज मांझी, उपाध्यक्ष महानंद पुरान, कोषाध्यक्ष सीतानाथ मांझी, सचिव कैलाश मांझी, निशिकांत गंझू तथा सदस्य भिखारी पुरान, शांतिरमन पुरान, वृंदावन पुरान, कृतिवास पुरान, रामधन मांझी, सुखलाल मांझी और लखींद्र मांझी सहित अन्य लोगों का योगदान रहा।
वहीं, युवा मोर्चा के त्रिलोचन पुरान, राम सिंह, दीपक, गुरुवा, योगेश, मदन, बुद्धेश्वर, कृष्णा, दिनेश, मनोज, सुनील, शिवा, करमा, सोमा, बिपिन, प्रहलाद, विष्णु, जय सिंह, उमाकांत, दिलेश्वर, सुरेश, भोलानाथ, रामकृष्ण पुरान सहित अन्य सभी युवाओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।
यह समारोह पुरान जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक पूजा-पद्धति, लोकगीतों और सामूहिक एकजुटता को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

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