“हजारीबाग में AIMIM के जिला सदस्यता प्रभारी अब्दुल बासित ने कहा— संविधान, मौलिक अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा ही सच्ची राष्ट्रभक्ति का आधार।
हजारीबाग। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) हजारीबाग जिला इकाई की ओर से जिला सदस्यता प्रभारी अब्दुल बासित ने शनिवार को एक प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि “वंदे मातरम् का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन भारतीय संविधान सर्वोपरि है।” उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को अपने वतन से प्रेम है और देशभक्ति किसी एक नारे, गीत या प्रतीक तक सीमित नहीं होती, बल्कि संविधान का सम्मान, कानून का पालन और राष्ट्र सेवा ही सच्ची देशभक्ति का परिचायक है।
प्रेस वक्तव्य में अब्दुल बासित ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रत्येक नागरिक को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा अपने धर्म का पालन, आचरण और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है और किसी भी कानून के क्रियान्वयन से यदि नागरिकों के अधिकारों या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रभाव पड़ता है तो उस पर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक चर्चा होना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान और मौलिक अधिकार दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। किसी भी कानून का उपयोग केवल वास्तविक एवं जानबूझकर किए गए अपमान के मामलों तक सीमित रहना चाहिए, न कि वैचारिक असहमति या राजनीतिक मतभेद रखने वालों के विरुद्ध।
अब्दुल बासित ने सभी नागरिकों से संविधान की भावना, लोकतांत्रिक मूल्यों और सभी के अधिकारों का सम्मान करते हुए एक मजबूत, न्यायपूर्ण और समावेशी भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में निहित है।
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