BreakingJharkhandझारखंडब्रेकिंग

2 फीट की हाइट, पहाड़ जैसा हौसला; नामी कॉलेज में प्रोफेसर बन गई वृंदानी

Share
Share
Khabar365news

कहते हैं इंसान की ऊंचाई नहीं, उसका हौसला उसे बड़ा बनाता है. गुजरात की वृंदानी पटेल ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. महज दो फीट की हाइट वाली 28 वर्षीय वृंदानी आज अहमदाबाद के एनसी बोडीवाला एंड प्रिंसिपल एमसी देसाई कॉमर्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हुई हैं. जिस समाज ने उनके कद को उनकी कमजोरी समझा, आज वही समाज उनकी सफलता को सलाम कर रहा है.

वृंदानी का सफर बेहद मुश्किलों भरा था. जब वह महज डेढ़ साल की थीं, तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया. इसके बाद उनकी पूरी परवरिश उनके पिता और दादी ने की. उनके पिता खुद भी तीन फीट लंबे हैं, लेकिन उन्होंने कभी हालात को अपनी बेटी के सपनों के आड़े नहीं आने दिया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वृंदानी कहती हैं, ‘मेरी हर सफलता मेरे पिता को समर्पित है. उन्होंने मुझे कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया. जब भी मैं टूटी, उन्होंने मुझे समाज में अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया.’

क्यों छोड़ना पड़ा मेडिकल का सपना?

बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहीं वृंदानी के लिए स्कूल ने भी पूरा सहयोग किया. 12वीं क्लास तक उन्हें खास बेंच दी गई ताकि वह आराम से पढ़ सकें. उन्होंने 10वीं में 81 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद उन्होंने बीकॉम और एमकॉम भी शानदार अंकों के साथ पूरा किया.

वृंदानी का सपना शुरू में डॉक्टर बनने का था, लेकिन उनके पिता ने उन्हें कॉमर्स की राह दिखाई. उनका मानना था कि मेडिकल क्षेत्र में शारीरिक सीमाएं बाधा बन सकती हैं. पिता की सलाह पर चलते हुए वृंदानी ने एमकॉम के बाद तुरंत GSET और NET दोनों परीक्षाएं पास कर लीं. हाल ही में उन्होंने अपना पीएचडी भी पूरा किया. इस पर वृंदानी कहती हैं, ‘पीएचडी पूरी करना मेरे लिए एक खास सपना था. भले मैं मेडिकल डॉक्टर न बन सकी, लेकिन अब शिक्षा के क्षेत्र में ‘डॉक्टर’ बन गई हूं.’

वृंदानी को कैसे मिली प्रोफेसर की नौकरी?

पढ़ाई पूरी करने के बाद वृंदानी ने सूरत के रांदेर इलाके में अपने पिता की ट्यूशन क्लास में पढ़ाना शुरू किया. पांच साल में उन्होंने बीकॉम और एमकॉम के 200 से ज्यादा छात्रों को अकाउंटेंसी, स्टैटिस्टिक्स, ऑडिटिंग और मर्केंटाइल लॉ जैसे विषय पढ़ाए. उनके लिए कोचिंग सेंटर में एक खास प्लेटफॉर्म और स्मार्ट बोर्ड की व्यवस्था की गई ताकि उन्हें पढ़ाने में कोई परेशानी न हो.

लेकिन असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उन्होंने कॉलेज में लेक्चरर बनने के लिए आवेदन किया. जब आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग ने दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती निकाली, तब वृंदानी ने पूरे गुजरात में आवेदन किए. उन्होंने लगभग सात अलग-अलग इंटरव्यू दिए. तीन बार उन्हें सिर्फ इस वजह से रिजेक्ट कर दिया गया कि इंटरव्यू बोर्ड को शक था कि वह छात्रों को संभाल पाएंगी या नहीं. खुद वृंदानी कहती हैं, ‘समाज में ही नहीं, कई बार दिव्यांग समुदाय के लोग भी मुझ पर भरोसा नहीं करते थे. मुझे बार-बार रिजेक्शन मिला, लेकिन मैंने हार नहीं मानी. चौथे प्रयास में आखिरकार मुझे सफलता मिल गई.’

वृंदानी बताती हैं कि लोग उनकी कद-काठी को देखकर अंदाजा लगा लेते थे कि वह क्लास नहीं संभाल पाएंगी, लेकिन उन्हें अपने विषय ज्ञान, छात्रों से जुड़ाव और आत्मविश्वास पर पूरा भरोसा था. यही भरोसा आखिरकार उन्हें उनके मुकाम तक ले गया.

उनकी जिंदगी में दुख भी कम नहीं रहे. सामाजिक समारोहों में अक्सर लोग उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन तानों को अनसुना करना सीख लिया. संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ. ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में उन्हें पूरे साढ़े तीन साल लग गए. लेकिन 2023 में उन्होंने यह जंग भी जीत ली और अब अपनी खुद की सेडान कार चलाती हैं. वह कहती हैं, ‘अब मैं खुद अपनी गाड़ी से कॉलेज जाऊंगी. यह मेरे लिए आज़ादी जैसा है.’

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Categories

Calender

October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  







Related Articles
ActiveJharkhandpatratupatratuRamgahRamgarh

जो भी मजदूरों को छटनी किया जा रहा है उन मजदूरों को फूल और फाइनल सेटलमेंट मुआवजा दिया जाए- मनोज कुमार महतो

Khabar365newsरिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु रविवार को एनटीपीसी मजदूर यूनियन एटक...

ActiveJharkhandpatratupatratuRamgahRamgarh

मैक्स लाइफ केयर हॉस्पिटल में डॉ. प्रमोद पासवान की सेवा शुरू

Khabar365newsरिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु पतरातू के लिए स्वास्थ्य सेवा के...

ActiveJharkhandpatratupatratuRamgahRamgarh

रोचाप में काली पूजा, मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर बैठक संपन्न, पूजा समिति का हुआ गठन

Khabar365newsरिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु पतरातू प्रखंड के रोचाप गांव में...