पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
पाकुड़। पाकुड़ जिला कल्याण कार्यालय के बैंक खाते से फर्जी एडवाइस के जरिए 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार 600 रुपये की अवैध निकासी के मामले ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है।
करोड़ों रुपये के इस बड़े वित्तीय घोटाले की जांच अब सीआईडी के हाथों में सौंप दी गई है, जिसके बाद जांच की रफ्तार तेज हो गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी की विशेष टीम पाकुड़ पहुंच चुकी है।
सीआईडी के डीएसपी रविंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का, नाजिर सहित कार्यालय के कई कर्मियों से लंबी और गहन पूछताछ की।
इस दौरान बैंकिंग लेनदेन, भुगतान आदेश और संबंधित फाइलों की बारीकी से जांच की गई।
बताया गया कि इस मामले में जिला कल्याण पदाधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी में कार्यालय अधीक्षक, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत करीब डेढ़ दर्जन लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घोटाला संगठित तरीके से अंजाम दिया गया।
इस घोटाले का खुलासा 8 दिसंबर 2025 को हुआ, जब भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, पाकुड़ के मुख्य प्रबंधक ने आईटीडीए निदेशक सह जिला कल्याण पदाधिकारी को पत्र भेजकर फर्जी निकासी की जानकारी दी।
इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को नगर थाना में मामला दर्ज किया गया।
शुरुआत में नगर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन राशि की विशालता और घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीआईडी को स्थानांतरित कर दी गई।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने बताया कि सीआईडी की टीम पाकुड़ में जांच कर रही है और अब इस पूरे मामले की विस्तृत एवं तकनीकी जांच सीआईडी द्वारा ही की जाएगी।
सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं।
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