विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में शनिवार को ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन व्याख्यान’ का भव्य आयोजन किया गया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्मदिवस से एक दिन पूर्व आयोजित यह व्याख्यान न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि विचार, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का जीवंत मंच बन गया। प्रथम व्याख्यान का विषय था “शिक्षा के वर्तमान मुद्दे एवं परिप्रेक्ष्य।“ यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता, इतिहास विभाग के आचार्य प्रो. स्वीन्द्र कुमार ने शिक्षा की मौजूदा चुनौतियों, गुणवत्ता सुधार, नई शिक्षा नीति और समाज में शिक्षा की भूमिका पर सरल, सारगर्भित और प्रेरक शब्दों में प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल डिग्री पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने का सबसे सशक्त साधन है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर विकास, आवास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार ने की। अपने संबोधन में उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचारों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए कहा, “शिक्षा ही सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत नींव है। यह आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है कि कोई व्यक्ति औपचारिक शिक्षा में सीमित होने के बावजूद अपने विचार और संघर्ष से इतिहास रच सकता है। आने वाला समय ऐसा भी होगा, जब उनके व्यक्तित्व और विचारों पर शोध और पीएचडी होगी।” इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पूरा सभागार सकारात्मक ऊर्जा, विचारशीलता और प्रेरणा से भरा हुआ नजर आया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन व्याख्यान न केवल एक स्मरण था, बल्कि यह संदेश भी देता है कि शिक्षा, विचार और संघर्ष मिलकर समाज को नई दिशा देते हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और प्रेरणादायक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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