झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में हंगामा देखने को मिला। कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर विपक्षी भाजपा विधायक पोस्टर लेकर वेल में पहुंचे, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। इसी बीच आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो का व्यवहार विवादित हो गया। तिवारी महतो असंतुष्ट होकर आसन के सामने पहुंचे और रिपोर्टर टेबल पर मुक्का मार दिया। इसके बाद उन्हें मार्शल आउट किया गया, हालांकि कुछ समय बाद स्पीकर ने उन्हें वापस बुलाया। सदन में इस घटना के बाद स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों से इस तरह का आचरण अपेक्षित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्टर टेबल पर मुक्का मारना असंसदीय और सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं है। स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष से भी अपील की कि वे अपने विधायक के आचरण पर ध्यान दें।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिला। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने तिवारी महतो के व्यवहार की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों ने तिवारी महतो को उकसाया, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि विपक्षी विधायकों से बार-बार संयम बनाए रखने का आग्रह किया गया, लेकिन तिवारी महतो का आचरण अनुचित था और भाजपा विधायकों का उसका समर्थन करना भी गलत है। इस पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों के उकसावे के कारण यह स्थिति बनी और झारखंड में “बाबुओं की सरकार” चल रही है।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष केवल सुर्खियों के लिए मुद्दा उठा रहे हैं और अगर कहीं भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही है तो सरकार कार्रवाई करने के लिए तैयार है। बहस के दौरान मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विधानसभा ठीक ढंग से चल रही है और इसके लिए स्पीकर धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि रजरप्पा मामले में सरकार ने डीजीपी के निर्देश पर कार्रवाई भी की है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि मेज पटकने से दर्द कम नहीं होता। साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीति में आचरण का महत्व होता है और आजसू विधायक को अपने व्यवहार पर खेद प्रकट करना चाहिए।
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