नगर निकाय चुनाव के बीच पार्टी लाइन से हटकर काम करने वाले करीब 20 नेताओं पर भाजपा अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी में है। दैनिक भास्कर में छपी विनय चतुर्वेदी की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार या चुनाव लड़ने वाले नेताओं को जल्द ही शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संगठन से निष्कासन तक की कार्रवाई हो सकती है। कार्रवाई की जद में आने वालों में डालटनगंज के पूर्व जिला अध्यक्ष परशुराम ओझा, धनबाद के पूर्व जिला अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार और जमशेदपुर महानगर के पूर्व जिला अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव प्रमुख हैं। इसके अलावा चास की मेयर प्रत्याशी परिंदा सिंह, देवघर के मेयर प्रत्याशी बाबा बलियासे तथा धनबाद के पूर्व विधायक संजीव सिंह को भी नोटिस भेजने की तैयारी है।
सूत्रों के अनुसार, संगठन ने संबंधित नेताओं की गतिविधियों, विरोधी प्रचार सामग्री, वीडियो और भाषणों के प्रमाण जुटा लिए हैं। पार्टी ने पहले कई चरणों में असंतुष्ट नेताओं से बातचीत की और उन्हें अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में काम करने या कम से कम विरोध से दूर रहने का आग्रह किया, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके। देवघर में बाबा बलियासे पार्टी समर्थित उम्मीदवार रीता चौरसिया के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। चास नगर निगम में परिंदा सिंह अधिकृत प्रत्याशी अविनाश कुमार को चुनौती दे रही हैं। डालटनगंज में परशुराम ओझा ने अपनी पत्नी जानकी देवी को मेदिनीनगर मेयर पद के लिए उतारा है। वहीं जमशेदपुर में राजकुमार श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव को मानगो क्षेत्र से अधिकृत प्रत्याशी संध्या सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा है। धनबाद में सत्येंद्र कुमार निर्दलीय रवि चौधरी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, जबकि पूर्व विधायक संजीव सिंह भी अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
झारखंड के निकाय चुनाव पर केंद्रीय नेतृत्व की सीधी नजर है। पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह और राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा को राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है। अरुण सिंह ने शुक्रवार को रांची में पार्टी समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो के समर्थन में सभाएं कीं। उनका कार्यक्रम मेदिनीनगर और गढ़वा में भी प्रस्तावित है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि निकाय चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी को लेकर किसी प्रकार का भ्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन अनुशासन के मुद्दे पर अब निर्णायक कार्रवाई के मूड में दिख रहा है।
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