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हनुमान कथा रहस्य में हनुमान जी के जीवन चरित्र को भक्तों ने जाना

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धनबाद से सैकड़ों भक्त पहुंचे कथा स्थल राशि स्थित नंदन पैलेस

धनबाद/ रांची:सोमवार को रांची, नंदन पैलेस में सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज के मुखारविंद से आयोजित श्री “हनुमान कथा रहस्यम” में हनुमान जी के जीवन चरित्र को जानने का भक्तों को दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। महाराज सत्य गुरु ऋतेश्वर ने बताया श्री रामचरितमानस में अगर प्रभु श्री राम जी का स्थान एक प्राण की तरह है तो भक्त शिरोमणि श्री हनुमान जी का स्थान धड़कन की तरह है।जिनका संसार में प्रादुर्भाव ही राम काज के लिए ही हुआ है उनके लिए अपने प्रभु श्री राम जी की चरण सेवा के अलावा दुनिया में कोई भी धर्म नहीं है श्री हनुमान जी के जीवन में अपना कुछ नहीं उनका परिचय भी उनके प्रभु से ही है लंका में दूत बनकर जाने पर जब रावण ने हनुमान जी से उनका परिचय पूछा तो दास हनुमान जी ने कहा “दासोहम कौशलेंद्रस्य” इससे ज्यादा उनका कोई परिचय नहीं।बचपन में सूर्य को निगल लेने की जो कथा प्रचलित है एक सदगुरु की दृष्टि से देखने पर जब बाल्यकाल में हनुमान जी को ज्ञान की भूख लगी तो भगवान सूर्य को गुरु रुप में ग्रहण करके उन्होंने अपनी भूख को शांत किया। महाराज ने हनुमंत कथा के माध्यम से बताया भगवान सूर्य सूर्य जोकि हनुमान जी के गुरु हैं और वानरराज सुग्रीव के पिता हैं तो गुरु शिष्य परंपरा की दृष्टि से हनुमान जी अत्यधिक बलशाली, बुद्धिशाली होने के बाद भी अपने गुरु पुत्र महाराज सुग्रीव के सचिव ही बनके रहे गुरु शिष्य परंपरा का इससे उच्च उदाहरण देखने को नहीं मिल सकता। महाराज ने कहा हनुमान जी जैसा सद्गुरु अगर मिल जाए तो जीव के प्रारब्ध भी पुरुषार्थ से मिटाए जा सकते हैं हनुमान जी जैसे सद्गुरु की कृपा से सुग्रीव जैसे कामी वानर भी 
“राम मिलाय राज पद दीन्हा”कभी लीला की दृष्टि से संजीवनी बूटी लेने गए हनुमान जी दिशा भ्रम होने पर अगर भ्रमित भी हो जाते हैं, गिर भी जाते हैं तो भी अपने प्रभु श्री राम की भूमि अयोध्या में ठाकुर जी की गोद में।भक्त और भगवान की लीलाएं अनंत हैं उनका एक चरित ही अनुसरण करने मात्र से जीव दुनिया में रहते ही उस परम आनंद को प्राप्त कर लेता है और यही कारण है की भगवान को प्रभु कहते हैं और भगवान के अनन्य भक्त को महाप्रभु कहा जाता है भक्त शिरोमणि श्री हनुमान जी महाराज को कोटि कोटि वंदन नमन। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गुलशन, अनिकेत, जतिन, और धनबाद से बहुत सारे भक्त और अनुयाई इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस आयोजन में महाराष्ट्र बंगाल बिहार राजस्थान दिल्ली मुंबई उड़ीसा समेत कई राज्यों से भी कथा सुनने के लिए यहां सम्मिलित हुए।

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