सद्दाम खान लोहरदगा ब्यूरो
लोहरदगा जिला में मानसून मेहरबान हुआ है। इससे किसानों के चेहरे पर एक बार फिर से मुस्कान लौट आया है। यहां पर मानसून की रफ्तार बढ़ने से तेज़ी से किसान वर्ग अपने खेतों में बुआई की हुई धान का बिचड़ा को रोपनी कार्य को अंजाम देने में जुट गए हैं। मानसून का मीटर बढ़ने से लोहरदगा जिला के किसानों ने खुशी जताई है और सारे काम धंधा छोड़ अपने खेतों में कूद पड़े हैं। लंबे समय तक लोहरदगा में मानसून की बेरूखी से इस बार फिर से किसानों के चेहरे पर अकाल के संकेत नजर आ रहा था, लेकिन श्रावण मास की पहली सोमवारी से ही लोहरदगा जिला अंतर्गत सभी क्षेत्रों में झमाझम बारिश के आगमन से किसानों के चेहरे पर मुस्कान वापस आया है, जिससे किसान वर्ग काफी हर्षित हैं और तेजी से धनरोपनी कार्य को पूरा करने में खेतों में दौड़ पड़े हैं। किसानों के अनुसार मानसून के लौटने से अब धनरोपनी कार्य को पूरा करने में काफी मददगार साबित होगा।
पिछले साल श्रावण मास तक हो चुका था 50 प्रतिशत धनरोपनी।
लोहरदगा जिला में पिछले साल भी मानसून की बेरूखी से किसानों को अकाल की मार भले ही झेलना पड़ा था, लेकिन श्रावण मास तक बीते वर्ष लगभग 50 प्रतिशत धनरोपनी कार्य को पूरा कर लिया गया था। हालांकि बीते साल रूक-रूककर दगाबाज बारिश ने किसानों को अंतिम समय में धोखा देने का कार्य किया था जिससे धनरोपनी के बाद भी धान की पैदावारी नहीं हो पाया था और लोहरदगा जिला के 90 प्रतिशत किसानों को अकाल की मार झेलना पड़ा था। इस बार पिछले साल की तरह ही बारिश का आना-जाना लगा हुआ।
एक सप्ताह बारिश की दगाबाज रवैया से धान का बिचड़ा मरकर नष्ट हो जाता।
लोहरदगा जिला में सबसे ज्यादा धान की फसल को किसान वर्ग बुआई करते हैं। यहां पर किसान वर्ग साल भर बेसब्री से धान की फसल बुआई हेतु इंतजार करते हैं, लेकिन साल 2023 में लोहरदगा जिला में अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों को अकाल की मार झेलना पड़ा था। जिले के ज्यादातर किसान कर्ज लेकर धान की खेती को वृहद पैमाने पर लगाए थे, परंतु अकाल हो जाने से अत्यधिक किसान कर्ज के तले दब कर मजबूरन पलायन कर गए थे। बता दें कि लोहरदगा जिला में एक सप्ताह तक यदि बारिश नहीं हुई होती तो किसानों द्वारा खेतों में लगाए गए धान का बिचड़ा मर जाता जिससे किसान वर्ग को दोहरी नुकसान उठाना पड़ सकता था।
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