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जब मुख्य सचिव ने लिख दिया, जांच होनी चाहिए कि कैसे आईएएस बना

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सचिवालय के सच का यह बेजोड़ उदाहरण है। अविभाजित बिहार के समय आईएएस बने उस अधिकारी की चर्चा पटना सचिवालय से लेकर झारखंड सचिवालय में आज भी होती है। यह आईएएस अधिकारी खुद अपने लिखे को भी शुद्ध शुद्ध नहीं पढ़ पाता था। किसी फाइल पर अपनी टिप्पणी को लिखने के तत्काल बाद उसे फाड़ देता था। उसके बाद फिर लिखता और फाड़ता था। इस अधिकारी का फाइल पर लिखना और फाड़ना आदत सी बन गयी थी। हालांकि साथ में काम करनेवाले अधिकारी और कर्मचारी बताते थे कि कहीं न कहीं ज्ञान और भाषा की कमी, ऐसा करने को उस अधिकारी को विवश करता था। सहकर्मी काफी परेशान रहा करते थे। जिस विभाग में उस आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग होती उसका मंत्री अपना माथा पीट लेता था। यही कारण बताया जाता है कि अविभाजित बिहार के समय चर्चित चीफ सेक्रेट्री रहे एसएन विश्वास ने एक बार फाइल पर टिप्पणी कर दी थी कि यह जांच का विषय है कि यह अधिकारी कैसे यूपीएससी कंपीट किया। कैसे आईएएस बन गया।

बिहार का बंटवारा होने के बाद जब झारखंड अलग राज्य बना तो इस चर्चित आईएएस की सेवा झारखंड को दे दी गयी। 1983 बैच के इस आईएएस अधिकारी को झारखंड कैडर मिला। वर्ष 2000 में झारखंड की सेवा में आने के बाद कुछ इन्हीं कारणों से इस आईएएस अधिकारी को कभी प्राइम पोस्टिंग नहीं मिली। इसके पीछे का कारण उनकी अल्पज्ञता रही। उनके वर्किंग स्टाइल और सरकारी काम-काज के बारे में जानकारी पर एक और चीफ सेक्रेट्री ने उन्हें हिदायत दे दी थी। तुम या तो फाइल आने से पहले आना या बाद में आना। तुम फाइल के साथ कभी मेरे पास नहीं आना। क्योंकि फाइल पर उनके द्वारा लिखी गयी टिप्पणी को ऊपर के अधिकारी समझ ही नहीं पाते थे और उस पर वह बहस करने लगते थे।

अल्पज्ञता की एक और कहानी उस समय चर्चित हुई थी, जब झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा। सैयद सिब्ते रजी झारखंड के राज्यपाल थे। झारखंड के ही मुख्य सचिव रहे जी कृष्णन को राज्यपाल का सलाहकार बनाया गया। उस समय यह अधिकारी मुख्य सचिव रैंक तक प्रमोट हो चुका था। उनकी पोस्टिंग मेंबर बोर्ड ऑफ रेवेन्यु के पद पर थी। क्योंकि मेंबर बोर्ड ऑफ रेवेन्यु का पद किसी चीफ सेक्रेट्री रैंक के अधिकारी के लिए चिह्नित है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राष्ट्रपति शासन में सलाहकार बने जी कृष्णन को पत्र लिख दिया कि उनकी प्राइम पोस्टिंग की जाए। वर्तमान पद से वह संतुष्ट नहीं हैं। यह अनूठा उदाहरण बना जिसमें कोई आईएएस अधिकारी अपनी प्राइम पोस्टिंग के लिए लिखित में आग्रह किया हो। जी हां, सचिवालय के इस सच के अंत में अब यह बता देना आवश्यक हो गया है कि वह अधिकारी कौन था। जी हां उस अधिकारी का नाम विष्णु कुमार था, जो 30 अप्रैल 2016 को मुख्य सचिव रैंक से सेवानिवृत हुए। उसके बाद वे फिर कभी ब्यूरोक्रेसी या पॉलिटिकल सर्किल में चर्चा में नहीं रहे।

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