पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
महेशपुर के ग्वाला पड़ा में ‘चुपके–चुपके’ चल रहा खेल?
महेशपुर (पाकुड़): सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर कुछ और ही बयां करती है। ऐसा ही एक मामला महेशपुर प्रखंड क्षेत्र के ग्वाला पड़ा के समीप सामने आया है, जहाँ पीसीसी सड़क निर्माण का कार्य तो जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन सूचना पट का कहीं कोई अता-पता नहीं है।
स्थल पर पहुँचने पर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—
👉 यह सड़क किस योजना से बन रही है?
👉 लागत कितनी है?
👉 कार्यादेश किसे मिला है?
👉 कार्य की अवधि और
गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है?
इन तमाम सवालों का जवाब देने वाला अनिवार्य सूचना पट गायब है। नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी निर्माण कार्य स्थल पर योजना से जुड़ी पूरी जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है, ताकि आम जनता भी योजना की निगरानी कर सके। लेकिन यहाँ तो जैसे सब कुछ चुपचाप, पर्दे के पीछे किया जा रहा हो।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि
“काम तो शुरू हो गया, लेकिन हमें आज तक नहीं बताया गया कि यह सड़क किस मद से बन रही है। कहीं कोई बोर्ड नहीं लगा है। ऐसे में शक होना लाज़मी है।”
ग्रामीणों में यह आशंका भी गहराती जा रही है कि
⚠️ बिना सूचना पट के काम का मतलब है—जवाबदेही से बचने की कोशिश।
⚠️ गुणवत्ता से समझौता और कागजों में खेल की आशंका।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रखंड स्तर के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर मौन साधे हुए हैं। यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा है, तो फिर सूचना पट लगाने में क्या परेशानी?
अब बड़ा सवाल यह है—
🔍 क्या संबंधित विभाग मामले की जांच करेगा?
🔍 क्या सड़क निर्माण की गुणवत्ता और योजना की पारदर्शिता पर कोई कार्रवाई होगी?
फिलहाल, ग्वाला पड़ा के समीप बन रही यह पीसीसी सड़क सुविधा से ज्यादा सवाल बनकर खड़ी है। जनता अब जवाब चाहती है—
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