पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
लिट्टीपाड़ा (पाकुड़): राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना लिट्टीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र के तलपहड़ी पंचायत अंतर्गत दराजमाठ गांव में पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है।
योजना के नाम पर हरियाली का सपना दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के तहत जमकर लूट मचाई गई, जबकि स्थिति यह है कि एक भी पौधा जीवित नहीं बचा।
योजना स्थल आज उजाड़ मैदान में तब्दील हो चुका है, जो सरकारी दावों और हकीकत के बीच की गहरी खाई को साफ तौर पर उजागर करता है। ग्रामीणों का कहना है कि पौधरोपण के बाद आवश्यक फेंसिंग, पानी की व्यवस्था, गड्ढा तैयारी और नियमित निगरानी जैसे बुनियादी प्रावधानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना का उद्देश्य हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि सरकारी राशि का बंदरबांट बनकर रह गया।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं लाभुकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही गांव में दोबारा पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से पौधरोपण कराने की अपील की है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब इस गंभीर मामले पर पंचायत सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना तक उचित नहीं समझा, जिससे प्रशासनिक उदासीनता और संदेह और गहरा गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर अनियमितता पर संज्ञान लेगा, या फिर बिरसा हरित ग्राम योजना ऐसे ही कागज़ों में हरी-भरी बनकर दम तोड़ती रहेगी?
Leave a comment