गरीबी पर टूटा कहर, काजीरकोड़ा में उजड़ा एक पूरा परिवार
पाकुड़ से जितेन्द्र यादव की रिपोर्ट
महेशपुर प्रखंड के मानिकपुर पंचायत अंतर्गत काजीरकोड़ा गांव में बीती रात एक दर्दनाक हादसे ने गरीब परिवार की दुनिया ही बदल दी। जिस घर में कल तक चूल्हा जलता था, सपने पलते थे और भविष्य की तैयारी चल रही थी — आज उसी जगह राख, धुआं और सन्नाटा पसरा हुआ है।
गांव निवासी सुकमूनी कोडाईन, उनकी बेटी मुनि कोडाईन और दामाद कालेश्वर कोड़ा के घर अचानक लगी आग ने पल भर में वर्षों की मेहनत को स्वाहा कर दिया। रात के सन्नाटे को चीरती आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
परिवार के मुताबिक, घर में छत ढलाई के लिए जोड़े गए 1 लाख 80 हजार रुपये नकद, एक भरी सोना, बीस भरी चांदी, बर्तन, कपड़े, अनाज (चावल-गेहूं) और जीवन की पहचान बने आधार कार्ड, वोटर कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज आग में जलकर पूरी तरह राख हो गए।
आग की लपटें देख गांव में हड़कंप मच गया। आसपास के ग्रामीण बाल्टी, पानी और मिट्टी लेकर दौड़े, किसी ने जान की परवाह किए बिना आग बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पाया गया, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
सुबह जब धुआं छंटा, तो सामने सिर्फ जली हुई दीवारें और राख का ढेर बचा था।
सुकमूनी कोडाईन की आंखों में आंसू और सवाल दोनों थे — अब रहेंगे कहां? खाएंगे क्या? दोबारा कैसे खड़े होंगे?
यह हादसा सिर्फ एक घर का जलना नहीं है, बल्कि एक गरीब परिवार के सपनों, बचत और भविष्य का जल जाना है। आज यह परिवार खुले आसमान के नीचे खड़ा है, आर्थिक संकट से जूझ रहा है और मदद की आस लगाए बैठा है।
पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल मुआवजा व राहत
सहायता देने की गुहार लगाई है, ताकि वे दोबारा जीवन की शुरुआत कर सकें।
गांव के लोगों का भी कहना है कि अगर समय रहते प्रशासनिक सहायता नहीं मिली, तो यह परिवार और गहरे संकट में डूब सकता है।
यह खबर सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि संवेदनशील सिस्टम के लिए एक सवाल है —
क्या गरीब की राख हुई ज़िंदगी को फिर से बसाने कोई आगे आएगा?
एक आग क्या लगी गरीब के घर में,
सालों की मेहनत एक रात में जल गई…
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