दुमका जिले के मसलिया प्रखंड स्थित हारोरायडीह पंचायत के मानरायडीह गांव से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जहां तीन मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। चार वर्ष पहले उनकी मां का निधन हो गया था और दो दिन पूर्व पिता सुनील हांसदा के गुजर जाने के बाद 11 वर्षीय मिनुका, 9 वर्षीय लीलमुनि और 6 वर्षीय सागर पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। परिवार के सहारे के बिना बच्चों की पढ़ाई और परवरिश पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, एक बच्ची का स्कूल में नामांकन तो हुआ है, लेकिन वह नियमित रूप से विद्यालय नहीं जा पा रही है। वहीं दो अन्य बच्चों का अब तक किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं हो सका है। आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल हो रहा है। इस मामले को द फॉलोअप के पत्रकार सनी शारद ने सोशल मीडिया के माध्यम से उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने दुमका के उपायुक्त को तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
सीएम ने निर्देश देते हुए कहा है कि मामले की जांच कर मिनुका और उसके भाई-बहनों की निरंतर शिक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही अन्य जरूरी मदद शीघ्र उपलब्ध कराई जाए और इसकी सूचना दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार से जुड़े अन्य अभिभावकों या रिश्तेदारों से संपर्क कर बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकारी हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि तीनों बच्चों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, जिससे उनका भविष्य संवर सके।
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