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सूत्रों के अनुसार कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां

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अमड़ापाड़ा बना ‘हफ्ता राज’ का अड्डा — बांसलोई नदी से अवैध बालू उठाव पर प्रशासन बेअसर

₹13,500 प्रति ट्रैक्टर साप्ताहिक वसूली का आरोप | राजस्व को करोड़ों की चपत | सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

पाकुड़/अमड़ापाड़ा:
सूत्रों के अनुसार पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड में इन दिनों कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद बांसलोई नदी से अवैध बालू उठाव का खेल धड़ल्ले से जारी है। हालात ऐसे हैं कि नियम-कानून कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर ‘हफ्ता राज’ हावी हैं

घाटों पर कब्जा, ट्रैक्टरों की कतार — बेखौफ चल रहा धंधा
बरमसिया, रांगा, कॉलोनी समेत कई नदी घाटों पर दिन-रात ट्रैक्टरों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं। बालू की ढुलाई इस कदर जारी है मानो यहां किसी भी प्रकार की रोक लागू ही न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि प्रशासन की मौजूदगी भी बेअसर साबित हो रही है।
₹13,500 ‘हफ्ता’ — अवैध कारोबार का इंजन
सूत्र बताते हैं कि हर ट्रैक्टर से ₹13,500 प्रति सप्ताह वसूले जा रहे हैं। इस कथित ‘हफ्ता सिस्टम’ ने अवैध खनन को संगठित कारोबार का रूप दे दिया है। सवाल उठता है कि आखिर इस वसूली का संरक्षण किसे प्राप्त है?
राजस्व की लूट, नदी का भविष्य अंधकार में

इस बालू उठाव से सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। वहीं बांसलोई नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। लगातार हो रहा दोहन आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है।
प्रशासन की खामोशी — सवालों के घेरे में सिस्टम
जब न्यायालय की रोक के बावजूद यह सब जारी है, तो प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।
क्या अधिकारियों को इसकी भनक नहीं?
या फिर सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई से दूरी बनाई जा रही है?
जनता पूछ रही जवाब
कोर्ट के आदेश की खुलेआम अनदेखी क्यों?
₹13,500 प्रति ट्रैक्टर वसूली किसके इशारे पर?
प्रशासन की चुप्पी—लापरवाही या संरक्षण?
आखिर कब रुकेगा बांसलोई नदी का यह अंधाधुंध दोहन?

थाना प्रभारी का बयान—“जल्द होगी कार्रवाई”

मामले पर थाना प्रभारी ने कहा है कि शिकायत मिली है और जल्द कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई केवल आश्वासन तक सीमित रहती है या जमीनी स्तर पर भी कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
अमड़ापाड़ा में फिलहाल हालात यह बयां कर रहे हैं कि कानून कमजोर और ‘हफ्ता राज’ मजबूत है। अब सबकी नजर प्रशासन पर है—क्या कार्रवाई होगी या यूं ही चलता रहेगा अवैध खेल?

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