मेदिनीनगर के योध सिंह नामधारी महिला कॉलेज परीक्षा केंद्र पर NEET UG परीक्षा के दौरान गंभीर अव्यवस्था देखने को मिली। रविवार को आयोजित इस राष्ट्रीय परीक्षा में कमरा नंबर 11 के 48 परीक्षार्थियों को निर्धारित समय दोपहर 2 बजे तक प्रश्न-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। छात्र सुबह 11 से 12 बजे के बीच केंद्र पहुंच चुके थे, लेकिन शाम 5 बजे तक भी उन्हें पेपर नहीं मिला, जिससे वे कक्ष में बैठे-बैठे परेशान होते रहे। शाम 5:37 बजे स्थिति तब बिगड़ गई जब एक छात्रा रोते हुए केंद्र के गेट तक पहुंची और अभिभावकों को जानकारी दी कि अब तक परीक्षा शुरू नहीं हुई है। इसके बाद बाहर मौजूद अभिभावक आक्रोशित हो गए और बच्चों को बिना परीक्षा दिलाए वापस ले जाने की मांग करने लगे। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हुई और पुलिस के साथ तीखी बहस भी हुई। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे असमंजस और गुस्सा बढ़ता गया।
अधिकारियों की एंट्री के बाद हरकत, वजह बताई गई तकनीकी
मामले की गंभीरता को देखते हुए शाम 6:18 बजे उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत मौके पर पहुंचे, जबकि कुछ ही देर बाद एसपी कपिल चौधरी भी वहां पहुंचे। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद परीक्षा शुरू कराने की प्रक्रिया तेज हुई। अभ्यर्थियों के अनुसार, पहले उन्हें बताया गया कि प्रश्न-पत्र का प्रिंट आउट तैयार किया जा रहा है। वहीं, सदर एसडीओ सुलोचना मीणा ने स्पष्ट किया कि भाषा माध्यम से जुड़ी समस्या के कारण देरी हुई, जिसे बाद में सुलझा लिया गया।
फोटोकॉपी से शुरू हुई परीक्षा, 10 घंटे तक रोके गए छात्र
आखिरकार प्रश्न-पत्र की फोटोकॉपी कराकर अभ्यर्थियों को दी गई और परीक्षा शाम 6:55 बजे शुरू हुई, जो रात 9:55 बजे तक चली। इस दौरान 48 छात्रों को करीब 10 से 11 घंटे तक केंद्र में ही रोके रखा गया। दोपहर 3 बजे से ही छात्र विरोध जता रहे थे, लेकिन देर शाम तक समाधान नहीं हुआ। अन्य कक्षों के परीक्षार्थियों की परीक्षा समय पर खत्म कर उन्हें घर भेज दिया गया, जबकि इन छात्रों को रोके रखा गया। इस घटना ने परीक्षा प्रबंधन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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