बोकारो के 30 स्कूलों के 1200 बच्चों को विगत 1 अप्रैल से मिड-डे-मील नहीं दिया जा रहा है. बताया जा रहा है कि स्कूलों को चावल का आवंटन नहीं किया गया है. मामला बोकारो के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत राजकीयकृत बालक मध्य विद्यालय पेटरवार, बालिका मध्य विद्यालय, उत्क्रमित मध्य विद्यालय खत्री टोला, दारिद और एनपीस पतकी समेत करीब 30 स्कूलों का है. चावल के आवंटन में देरी की वजह से इन स्कूलों में मध्यान भोजन योजना बंद है. दावा है कि मध्यान भोजन बंद होने से बच्चों की दैनिक उपस्थिति में भी कमी आई है.
1 अप्रैल से स्कूलों में चावल उपलब्ध नहीं
राजकीयकृत बालक मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय महतो ने बताया कि 1 अप्रैल से विद्यालय में चावल उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण एमडीएम संचालन में काफी परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि किसी तरह 80 किलो चावल पीडीएस दुकानदार से उधार लेकर 1-2 दिन तक बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया गया, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह प्रभावित हो गई है.
डिजिटल इंडिया का दावा क्या खोखला है!
गौरतलब है कि एक ओर तो झारखंड में साहब के लिए कागजों पर डिजिटल इंडिया दौड़ रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि बोकारो में एक बोरी चावल के लिए पूरी शिक्षा व्यवस्था के साथ जिला प्रशासन घुटनों पर आ गई है. एक तरफ डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जा रहा है और दूसरी तरफ बोकारो के पेटरवार में 1200 नौनिहालों की थाली पर सिस्टम ने ताला लगा दिया है. 30 स्कूल, 1200 बच्चे और पिछले कई दिनों से एक दाना भी नसीब नहीं हुआ है. वजह? सरकारी बाबू ‘चावल का आवंटन’ भूल गए.
बोकारो डीसी ने समाधान का भरोसा दिया
बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने कहा है कि इस तरह की समस्या मीडिया के संज्ञान में मेरे पास आज आई है जल्द ही इसका समाधान किया जायेगा। एक से दो दिन के अंदर सभी स्कूलों में एमडीएम सुचारू रूप से संचालित हो जाएगी चावल के अभाव में कुछ स्कूल में एमडीएम बाधित हुई है. हमने जिला शिक्षा पदाधिकारी को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मध्यान भोजन कैसे सुचारू रूप से चले इसके लिए बीआरसी सीआरपी से रिपोर्ट मांगी जाए.
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