केंद्रीय अस्पताल ढोरी की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। ताजा मामला बड़कीटांड निवासी जितेंद्र गिरी के नौ वर्षीय मासूम पुत्र की मौत से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में इलाज के दौरान जब बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी, तो वहां के डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए बोकारो रेफर कर दिया। अस्पताल की इस लचर रेफरल प्रणाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में भारी असंतोष है।
रास्ते में थमी सांसें, परिजनों का गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण बच्चे की जान गई। जब मासूम को बोकारो ले जाया जा रहा था, तब अस्पताल से उसे जिस ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे भेजा गया था, वह रास्ते में ही खत्म हो गया। ऑक्सीजन की सप्लाई बीच में ही बंद हो जाने के कारण मासूम ने बोकारो पहुंचने से पहले, रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद से पीड़ित परिवार और परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका साफ कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिला होता और रास्ते के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई होती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
‘रेफर सिस्टम’ पर उठते सवाल और स्थानीय आक्रोश
इस घटना के बाद केंद्रीय अस्पताल ढोरी के ‘रेफर सिस्टम’ और अस्पताल की आंतरिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अस्पताल में गंभीर मरीजों को संभालने या उनका आपातकालीन इलाज करने की व्यवस्था बेहद कमजोर है। अस्पताल प्रबंधन अपनी कमियों को छिपाने के लिए अधिकतर मामलों में मरीजों को सीधे रेफर कर देता है, जिससे मरीजों की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है।
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