रांची। झारखंड में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बावजूद बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 337 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी 2,379 साइबर अपराध के मामले पेंडिंग हैं। इससे राज्य में साइबर पुलिसिंग की प्रभावशीलता और जांच की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की ओर से लगातार कार्रवाई और गिरफ्तारी की जा रही है। कई मामलों में आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई है।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामलों का लंबित रहना पुलिस के सामने चुनौती को दिखाता है। साइबर अपराध के मामलों में मोबाइल, बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य ऑनलाइन साक्ष्यों की जांच करनी पड़ती है, जिससे जांच प्रक्रिया कई बार लंबी हो जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित जांच अधिकारियों और तेज डिजिटल फॉरेंसिक व्यवस्था की जरूरत है। अलग-अलग राज्यों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय भी जांच को गति दे सकता है।
पुलिस की ओर से साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए जागरूकता अभियान और कार्रवाई लगातार जारी रखने की बात कही जाती रही है। लोगों से ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक और संदिग्ध कॉल से सावधान रहने की अपील भी की जाती है।
अब बड़ी चुनौती लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना और साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचना है। 337 गिरफ्तारियों के बावजूद 2,379 मामलों का लंबित रहना इस दिशा में पुलिस के सामने मौजूद चुनौती को उजागर करता है।
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