
हजारीबाग। दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों का उजाला भरने और मानवता का संदेश देने का भी पर्व है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए हजारीबाग पुलिस ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की है। पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग के निर्देश पर जिले के चार थानों के थाना प्रभारियों ने दीपावली के पावन अवसर पर सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय सेवा की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पुलिस की एक अलग और सकारात्मक छवि को सामने रखा।

इस विशेष पहल के तहत सदर थाना प्रभारी चंद्रशेखर कुमार, कोर्रा थाना प्रभारी नेमधारी रजक, बड़ा बाजार ओपी प्रभारी मुकेश रजक एवं लोहसिंघना थाना प्रभारी निशांत केरकेट्टा संयुक्त रूप से हुरहुरू स्थित दिव्यांग बच्चों के विद्यालय पहुंचे। यहां बच्चों के बीच गर्म कपड़े एवं मिठाइयों का वितरण किया गया। पुलिस पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ समय बिताकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी और दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान बच्चों के प्रति अपनत्व, स्नेह और संवेदनशीलता का भाव साफ नजर आया।
पुलिस की यह पहल केवल मिठाई और गर्म कपड़ों के वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन परिवारों तक भी मदद पहुंचाई गई, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत थी। इसी क्रम में कारू खंडेलवाल के परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब होने की जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए सदर थाना प्रभारी के माध्यम से परिवार को राशन उपलब्ध कराकर आवश्यक सहयोग कराया। बताया गया कि कोरोना महामारी के दौरान कारू खंडेलवाल का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा है। दीपावली के अवसर पर बालक को गर्म कपड़े भी उपलब्ध कराए गए, ताकि त्योहार की खुशियों से वह भी वंचित न रहे।

इस पूरे अभियान में पुलिस अधीक्षक, हजारीबाग की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी पहल के साथ चारों थाना प्रभारियों की सक्रिय भागीदारी एवं समर्पण विशेष रूप से सराहनीय रहा। चंद्रशेखर कुमार, नेमधारी रजक, मुकेश रजक और निशांत केरकेट्टा ने अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के बीच पहुंचकर यह साबित किया कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अपराध पर अंकुश लगाना ही नहीं, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनना भी है।
हजारीबाग पुलिस की इस पहल ने यह संदेश दिया कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील हृदय होता है, जो जरूरतमंदों की पीड़ा समझता है और उनके जीवन में खुशियों का उजाला लाने के लिए तत्पर रहता है। निश्चित रूप से दीपावली के अवसर पर किया गया यह मानवीय प्रयास पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास, सहयोग एवं आत्मीयता के रिश्ते को और मजबूत करेगा।
वर्दी का असली सम्मान तब और बढ़ जाता है, जब उसके साथ मानवता, संवेदना और सेवा का भाव जुड़ जाता है। हजारीबाग पुलिस की यह पहल इसी सच्चाई की एक खूबसूरत मिसाल है।





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