झारखंड के दो वरिष्ठ नौकरशाहों के बीच हुई कथित मोबाइल बातचीत का ऑडियो रविवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता रहा। इस ऑडियो में राज्य के अधिकारी, विधायक, ईडी के अफसरों और पत्रकारों को लेकर चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कथित ऑडियो को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें दो शीर्ष नौकरशाहों के बीच हुई फोन बातचीत का ऑडियो प्राप्त हुआ है। हालांकि उन्होंने इसकी सत्यता पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।
बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि मुद्दा यह नहीं है कि बातचीत में क्या कहा गया, बल्कि चिंता इस बात की है कि यदि सत्ता के शीर्ष पर बैठे अधिकारियों के फोन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर मुख्यमंत्री, सत्ता पक्ष-विपक्ष के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों, नौकरशाहों और आम नागरिकों की निजता कितनी सुरक्षित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल करते हुए कहा कि क्या राज्य इसी तरह जासूसी के आधार पर चलाया जा रहा है? उनका कहना था कि जब उच्च पदों पर बैठे अधिकारी ही एक-दूसरे की जासूसी के दायरे में हों या उनके फोन सुरक्षित न हों, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे माने?
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि वायरल ऑडियो की सत्यता की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
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