खोजी और जनपक्षधर पत्रकारिता रंग लाती है। इसका जीता-जागता उदाहरण जामताड़ा में देखने को मिला है। बीते 30 मार्च को ‘फॉलोअप’ ने “जामताड़ा का यह गांव आज भी अंधेरे में, बिजली नहीं होने के कारण कई लोगों ने किया पलायन” शीर्षक से एक खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस खबर के सामने आते ही जिला प्रशासन और बिजली विभाग की नींद टूटी। नतीजतन, आजादी के 78 साल बाद आखिरकार जामताड़ा प्रखंड के उदल बनी पंचायत अंतर्गत आने वाले आसानचुवा, जोरियापार और कोलपाड़ा गांव में अब बिजली का उजाला पहुंचने जा रहा है।
जामताड़ा उपायुक्त (DC) के सख्त निर्देश के बाद बुधवार देर शाम बिजली विभाग के आला अधिकारी खुद सुदूर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और नए बिजली कनेक्शन लेने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी।
इस ऐतिहासिक पहल पर स्थानीय समाजसेवी मंतोष महतो ने ‘फॉलोअप’ का आभार जताते हुए कहा कि वर्षों से अंधकार में जी रहे ग्रामीणों में अब भारी खुशी है। उन्होंने बताया, “हम सभी ग्रामीणों को लेकर गुरुवार को बिजली कार्यालय जा रहे हैं, ताकि कनेक्शन की कागजी प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जा सके।”
आपको बता दें कि इस गांव के लोग पूरी तरह से उम्मीद खो चुके थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे नेताओं, मंत्रियों से लेकर आला अधिकारियों तक के दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके थे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। गांव में बिजली न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई ठप हो गई थी और रोजगार के अभाव व बदहाली के चलते अधिकांश परिवारों ने पलायन करना शुरू कर दिया था।
‘फॉलोअप’ की टीम ने ग्रामीणों के इस दर्द को समझा और इसे मजबूती से उठाया। खबर के असर से आज ग्रामीणों के चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट आई है। ग्रामीण भावुक होकर कह रहे हैं कि ‘फॉलोअप’ ने उनके गांव की जिंदगी को फिर से बसाने का काम किया है।
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