आदिवासी नेत्री निशा भगत द्वारा दिए गए बयान “महादेव आदिवासियों के देवता हैं, हिंदुओं ने उन्हें अपना लिया” पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेत्री अंशु तिवारी सिन्हा ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों से परे, भ्रामक और समाज को विभाजित करने वाला करार दिया है।
अंशु तिवारी सिन्हा ने कहा कि भगवान महादेव अर्थात शिव हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और मूल देवताओं में से एक हैं। उनका उल्लेख ऋग्वेद में रुद्र के रूप में, यजुर्वेद और अथर्ववेद में शिव स्वरूप में तथा उपनिषदों और पुराणों में विस्तार से मिलता है। शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंदपुराण जैसे ग्रंथ महादेव को सृष्टि के आरंभ से जुड़ा हुआ बताते हैं। यह स्पष्ट करता है कि महादेव की उपासना हिंदू धर्म की जड़ों में समाई हुई है।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, सोमनाथ, महाकाल, रामेश्वरम जैसे बारह ज्योतिर्लिंग भारत की हिंदू आस्था के जीवंत प्रमाण हैं। ये तीर्थ न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक निरंतरता को भी दर्शाते हैं। सदियों से करोड़ों हिंदू महादेव को अपना आराध्य मानते आए हैं।
अंशु तिवारी सिन्हा ने स्पष्ट किया कि सनातन हिंदू परंपरा कभी भी संकीर्ण नहीं रही। इस संस्कृति ने हमेशा आदिवासी समाज, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं को सम्मान के साथ अपने भीतर समाहित किया है। आदिवासी समाज हिंदू सांस्कृतिक परिवार का अभिन्न हिस्सा रहा है, न कि उससे अलग कोई इकाई।
उन्होंने कहा,
“यह कहना कि हिंदुओं ने महादेव को अपना लिया, इतिहास और सनातन दर्शन दोनों का अपमान है। सच्चाई यह है कि महादेव हिंदू धर्म के देवता थे, हैं और हमेशा रहेंगे। वे किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की आस्था का केंद्र हैं।”
अंशु तिवारी सिन्हा ने ऐसे बयानों को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए कहा कि आस्था के विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए विवादित बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे विभाजनकारी विचारों को नकारें और सनातन संस्कृति की एकता एवं समरसता को मजबूत करें।
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