धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि झारखंड में वर्षों से शिक्षक पात्रता परीक्षा (J-TET/TET) का आयोजन न होना, हेमंत सोरेन सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि पूरे कार्यकाल में एक भी टेट परीक्षा नहीं कराई गई। नौ वर्षों से यह परीक्षा लंबित पड़ी है, जिससे लाखों बेरोजगार युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को गुमराह कर उनके सपनों के साथ खिलवाड़ कर रही है। एक तरफ मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि 26,000 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, लेकिन इसकी नियमावली तक स्पष्ट नहीं है। यदि भर्ती का आधार J-TET है तो परीक्षा कब होगी? नौ साल से परीक्षा नहीं हुई, तो उम्र सीमा क्या होगी? उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो सरकार ने युवाओं का भविष्य बर्बाद करने की ठान ली है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसी गंभीर व्यवस्था को केवल विज्ञापनों और खोखले दावों से नहीं चलाया जा सकता। करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक नियुक्ति सिर्फ 150-200 की हो रही है। सरकार को विज्ञापनबाज़ी छोड़कर पदाधिकारियों पर सख्ती करनी चाहिए।
तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां निजी शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा दे रही हैं, जिसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है और उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। यह प्रवृत्ति बेहद निंदनीय और अस्वीकार्य है।
उन्होंने पारा शिक्षक संघ की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। तिवारी ने कहा कि सहायक अध्यापक, जो खुद इस नियमावली से प्रभावित हैं, यदि समय रहते एकजुट होकर आंदोलन करते, तो आज यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। उन्होंने कहा कि सरकार को पदाधिकारी भी गुमराह कर रहे हैं।
अंत में तिवारी ने नव-नियुक्त सहायक आचार्यों से अपील की कि वे विद्यालयों में बच्चों को पूरी निष्ठा से पढ़ाएं और शिक्षा को केवल रोजगार का साधन न मानकर समाज निर्माण का माध्यम बनाएं।
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