झारखंड में CID के खोजी कुत्तों को अब उच्च गुणवत्ता वाला भोजन दिया जाएगा। उनकी शारीरिक क्षमता और विस्फोटक सूंघने की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने यह अहम निर्णय लिया है। राज्य में पहली बार खोजी कुत्तों के लिए विदेशी ब्रांड के पैक्ड फूड की खरीद की जा रही है। सीआईडी द्वारा फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और स्पेन में निर्मित प्रीमियम खाद्य उत्पादों का चयन किया गया है। 6 अप्रैल को जारी पत्र में इन खाद्य ब्रांड्स की जानकारी दी गई है। श्वान दस्ते को रॉयल कैनिन मैक्सी और डायबेक सेंस जैसे विशेष डॉग फूड उपलब्ध कराए जाएंगे। इन खाद्य पदार्थों में कई प्रकार के कार्बनिक यौगिक शामिल हैं, जो कुत्तों की शारीरिक क्षमता और सूंघने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं।
संतुलित आहार बढ़ाता है कार्यक्षमता
विभाग का मानना है कि बेहतर पोषण मिलने से श्वान दस्ते की कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी। ये कुत्ते विस्फोटक खोजने, अपराधियों का पीछा करने और हत्या व चोरी जैसे मामलों के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पशु विशेषज्ञ रोहित पाल के अनुसार संतुलित आहार श्वानों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। सर्च ऑपरेशन के दौरान उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है, जबकि उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उनके नर्वस सिस्टम को मजबूत करता है और फोकस करने की क्षमता को बेहतर बनाता है।
हर कुत्ते पर सलाना खर्च है 1 लाख 44 हजार
फिलहाल राज्य में सीआईडी के पास 58 प्रशिक्षित खोजी श्वान हैं, जिनमें बेल्जियम शेफर्ड और लैब्राडोर नस्ल प्रमुख हैं। इन्हें ट्रैकर और स्निफर दो श्रेणियों में प्रशिक्षित किया जाता है और इनकी तैनाती मुख्य रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में होती है। खर्च की बात करें तो एक खोजी कुत्ते पर प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये खर्च होते हैं, जबकि सालाना खर्च करीब 1.44 लाख रुपये प्रति श्वान है। झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1,16,663 रुपये है, जो एक श्वान पर होने वाले वार्षिक खर्च से कम है।
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