रांची। जगन्नाथपुर मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी भी ड्राफ्ट योजना (Draft Scheme) को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित सभी पक्षों से बातचीत की जाएगी और उनकी राय ली जाएगी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन और उससे जुड़े विभिन्न पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि किसी भी प्रस्तावित योजना को तैयार करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना आवश्यक है।
कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में संवाद और सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। इसलिए ड्राफ्ट योजना बनाने से पहले हितधारकों के साथ चर्चा कर उनकी आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा।
जगन्नाथपुर मंदिर से जुड़ा मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में है और मंदिर प्रबंधन व्यवस्था को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग मांगें सामने आती रही हैं। इसी संदर्भ में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह संकेत दिया कि किसी भी निर्णय में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा और किसी पक्ष की बात सुने बिना आगे नहीं बढ़ा जाएगा।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि भविष्य की किसी भी प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी योजना से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
फिलहाल मामले की अगली सुनवाई और आगे की प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है। अदालत के निर्देश के बाद संबंधित पक्षों से संवाद की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
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