
कहीं पोल गिरे, कहीं तार टूटे, कई इलाकों में बिजली गुल; पर्याप्त मानवबल की कमी से बहाली कार्य प्रभावित, भूमिगत केबलिंग की उठी मांग

हजारीबाग। चक्रवाती मौसम और तेज हवा के बीच हजारीबाग में बिजली व्यवस्था एक बार फिर बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है। शहर और आसपास के कई इलाकों में पिछले करीब 16 घंटे से बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बिजली गुल रहने से घरों से लेकर दुकानों, छोटे-बड़े व्यवसायों और जरूरी सेवाओं तक पर इसका असर देखने को मिल रहा है।
तेज हवा और खराब मौसम के कारण कई स्थानों पर बिजली के पोल गिरने, तार टूटने और विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। कई जगहों पर विद्युत संरचना को नुकसान पहुंचने के बाद भी बिजली बहाली में समय लग रहा है। लोगों का कहना है कि घंटों बिजली नहीं रहने से मोबाइल चार्जिंग, पानी की व्यवस्था, घरेलू कामकाज और व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

चक्रवाती मौसम में पेड़ गिरने और बिजली के पोल-तार क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं असामान्य नहीं हैं। लेकिन लगातार कई घंटे तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने से आपदा के दौरान विभाग की तैयारी और उपलब्ध संसाधनों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि विद्युत विभाग के पास यदि पर्याप्त संख्या में तकनीकी कर्मचारी, मरम्मत दल और जरूरी संसाधन उपलब्ध हों तो बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत का काम समानांतर रूप से कराया जा सकता है। एक स्थान पर मरम्मत के दौरान दूसरे प्रभावित क्षेत्रों में भी टीम सक्रिय रहे, तो बहाली में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।
हर बार तेज हवा या आंधी के बाद कई इलाकों में बिजली के पोल और तार गिरने की समस्या सामने आती है। इससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित होती है, बल्कि सड़क पर गिरे तार और पोल लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन जाते हैं।
ऐसे में जरूरत केवल खराबी ठीक करने की नहीं, बल्कि विद्युत व्यवस्था को भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाने की है। पुराने और कमजोर पोलों की पहचान कर उन्हें बदलने, तारों की नियमित जांच कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है।
शहरी क्षेत्रों में बार-बार होने वाली ऐसी समस्याओं को देखते हुए भूमिगत विद्युत केबलिंग पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। घनी आबादी और महत्वपूर्ण बाजार क्षेत्रों में बिजली के तारों को भूमिगत करने से तेज हवा, पेड़ गिरने और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं के कारण होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हजारीबाग जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में भविष्य की बिजली व्यवस्था को केवल पुराने ढांचे की मरम्मत तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक और मजबूत विद्युत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
लोगों का कहना है कि बिजली विभाग प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तत्काल पेट्रोलिंग और मरम्मत टीमों को सक्रिय करे तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बिजली बहाल की जाए। साथ ही, बार-बार बिजली संकट वाले इलाकों को चिह्नित कर वहां नए पोल, मजबूत तार और आधुनिक विद्युत प्रणाली विकसित की जाए।
लोगों की मांग है कि बिजली बहाली के साथ-साथ विभाग इस पूरे मामले को भविष्य के लिए सबक के रूप में ले और हजारीबाग में ऐसी विद्युत व्यवस्था विकसित करे, जो तेज हवा और खराब मौसम के दौरान भी कम से कम प्रभावित हो।
16 घंटे का बिजली संकट केवल अंधेरे की समस्या नहीं, बल्कि शहर की विद्युत व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत का संकेत भी है। अब देखना यह होगा कि विभाग तत्काल बिजली बहाल करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
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