रिपोर्ट – सुमित कुमार पाठक पतरातु
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जल संसाधन विभाग और विधि विभाग के बजट प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोशन लाल चौधरी ने राज्य की नदियों की बिगड़ती स्थिति और न्याय व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों को सदन में उठाया।
सदन को संबोधित करते हुए विधायक चौधरी ने कहा कि जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी केवल सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्रमुख नदियाँ—दामोदर, स्वर्णरेखा और बराकर—आज प्रदूषण, अवैध बालू खनन और अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियों के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार इन नदियों के कई हिस्से प्रदूषित श्रेणी में आ चुके हैं। राज्य के नगर निकायों का लगभग 70 से 80 प्रतिशत सीवेज बिना शोधन के सीधे नदियों में बहाया जा रहा है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है।
विधायक चौधरी ने कहा कि राज्य में चल रही कोयला खनन परियोजनाओं के कारण कई स्थानों पर नदियों के प्राकृतिक बहाव को भी डाइवर्ट किया गया है। उत्तरी कर्णपुरा कोलफील्ड, सीसीएल की खनन परियोजनाओं तथा झरिया और बोकारो कोलफील्ड क्षेत्रों में खनन विस्तार के लिए दामोदर नदी के प्रवाह को प्रभावित किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में भी एनटीपीसी की परियोजनाओं के कारण दामोदर नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ा है, जिससे कई छोटी नदियाँ और जलधाराएँ प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार दामोदर बेसिन में खनन के कारण 100 से अधिक छोटी नदियाँ और जलधाराएँ प्रभावित हुई हैं, जिससे नदी तंत्र और भूजल स्तर दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
इसके अलावा बोकारो, जमशेदपुर, धनबाद और रामगढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों द्वारा नदियों और भूजल का भारी दोहन किए जाने की बात भी उन्होंने उठाई। जल विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड में उद्योगों द्वारा प्रतिदिन 300 से 400 मिलियन लीटर से अधिक पानी का उपयोग किया जाता है, जिसका बड़ा हिस्सा दामोदर और स्वर्णरेखा बेसिन से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जल उपयोग और प्रदूषण की निगरानी की व्यवस्था अभी पर्याप्त नहीं है।
विधायक चौधरी ने अवैध बालू खनन को भी नदियों की स्थिति बिगड़ने का बड़ा कारण बताते हुए कहा कि अत्यधिक बालू निकासी से नदी का तल गहरा हो रहा है, भूजल स्तर गिर रहा है और कई स्थानों पर नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि नदियों के प्राकृतिक बहाव को डाइवर्ट करने वाली गतिविधियों की सख्त निगरानी की जाए, उद्योगों द्वारा जल उपयोग और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, अवैध बालू खनन पर कड़ी रोक लगाई जाए तथा शहरों में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था की जाए।
वहीं विधि विभाग के बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक चौधरी ने राज्य की न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों में लाखों मामले लंबित हैं, जिसके कारण आम लोगों को न्याय पाने के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति और मामलों की पैरवी में कई खामियाँ हैं, जिसके कारण कई मामलों में सरकार को अदालतों में हार का सामना करना पड़ता है। नियोजन और नियुक्ति से जुड़े मामलों में नियमों का सही पालन नहीं होने के कारण भी सरकार को बार-बार न्यायालय से झटका लग रहा है, जिससे युवाओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति बन रही है।
सदन के माध्यम से विधायक रोशन लाल चौधरी ने सरकार से आग्रह किया कि इन सभी गंभीर मुद्दों पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि राज्य की नदियों का संरक्षण हो सके और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।
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