महेशपुर में पत्थर खदान की लीज सीमा से बाहर उत्खनन और CTO की निर्धारित क्षमता से अधिक क्रशिंग के आरोप, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पाकुड़। पाकुड़ जिले में संचालित पत्थर खदानों और क्रशर प्लांटों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खासकर महेशपुर क्षेत्र में कायसुद्दीन शेख की पत्थर खदान को लेकर लीज की निर्धारित सीमा से बाहर खनन किए जाने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त CTO (Consent to Operate) में स्वीकृत क्षमता से अधिक पत्थर क्रशिंग किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
यदि शिकायतों की पुष्टि जांच में होती है, तो यह खनन नियमों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है। ऐसे में केवल कागजी जांच के बजाय प्रशासनिक स्तर पर तत्काल स्थल निरीक्षण और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री से पाकुड़ जिले की खदानों और क्रशर प्लांटों की जांच कराने की मांग
पाकुड़ जिले में संचालित सभी पत्थर खदानों एवं क्रशर प्लांटों की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-सी खदान अपनी स्वीकृत लीज सीमा के भीतर संचालित है और कहां निर्धारित क्षेत्र से बाहर उत्खनन की शिकायतें हैं। इसी तरह प्रत्येक क्रशर प्लांट की CTO में निर्धारित उत्पादन क्षमता और वास्तविक क्रशिंग का मिलान कराया जाए।
जांच में इन बिंदुओं को प्राथमिकता दी जाए:
- सभी पत्थर खदानों की सरकारी स्तर पर लीज सीमा की मापी कराई जाए।
- लीज क्षेत्र से बाहर उत्खनन की शिकायतों पर भौतिक सत्यापन किया जाए।
- सभी क्रशर प्लांटों की CTO और स्वीकृत उत्पादन क्षमता की जांच हो।
- वास्तविक क्रशिंग एवं उत्पादन का स्वीकृत क्षमता से मिलान कराया जाए।
- पर्यावरणीय मानकों, धूल नियंत्रण और प्रदूषण संबंधी नियमों के अनुपालन की जांच हो।
- खनन परिवहन, चालान और अन्य आवश्यक अनुमतियों का सत्यापन किया जाए।
- जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और आवश्यकतानुसार संचालन पर रोक लगाई जाए।
आखिर विभागीय निगरानी किस काम की?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी खदान में लीज सीमा से बाहर खनन हो रहा है या किसी क्रशर में स्वीकृत क्षमता से अधिक उत्पादन किया जा रहा है, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था क्या कर रही है? क्या नियमित निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
जिला प्रशासन, जिला खनन पदाधिकारी और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से मांग है कि महेशपुर की संबंधित खदान सहित पूरे पाकुड़ जिले की खदानों एवं क्रशर प्लांटों की संयुक्त और निष्पक्ष जांच कराई जाए। मुख्यमंत्री स्तर से भी इस मामले में संज्ञान लेकर जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग उठ रही है।
नियम तोड़ने वालों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित संचालक चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल संबंधित खदान के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। खदान संचालक और संबंधित विभागों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
अब पाकुड़ की जनता का सवाल है—क्या पूरे जिले की खदानों और क्रशर प्लांटों की निष्पक्ष जांच होगी, या शिकायतों के बाद भी मामला फाइलों में ही दबा रहेगा?





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