
सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने ली सुध, किया पहल, जागी आस, कबाड़ होने से बच जाएगा 46 लाख की जीवनरक्षक एम्बुलेंस
हजारीबाग
हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संसाधनों के रख-रखाव को लेकर व्याप्त घोर लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी तंत्र की उदासीनता का आलम यह था कि करीब पांच साल पहले डीएमएफटी मद से लगभग 46 लाख की लागत से खरीदी गई एक बेशकीमती एम्बुलेंस कबाड़ में तब्दील होने की ओर बढ़ रही थी। विशेष रूप से हृदय रोगियों (कार्डिएक पेशेंट्स) को आपातकालीन सेवाएं देने के उद्देश्य से आई यह एम्बुलेंस पिछले काफी समय से अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़ी धूल फांक रही थी। लाखों की लागत वाले संसाधनों का उपयोग न होना न केवल वित्तीय हानि है, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रबंधन की संवेदनहीनता को भी बखूबी दर्शाता है।
इस गंभीर स्थिति पर तब संज्ञान लिया गया जब हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी की नजर इस बदहाल एम्बुलेंस पर पड़ी। उन्होंने इस स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और जनहित में इसे बचाने एवं सुचारु करने की दिशा में तत्काल सक्रिय पहल की। सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने इस मामले को लेकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनुकरण पूर्ति से मुलाकात की और उन्हें एम्बुलेंस की मौजूदा दयनीय स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग किया कि आपातकालीन मरीजों की सेवा के लिए इस एम्बुलेंस को अविलंब सुचारू किया जाए ताकि जनता को इसका लाभ मिल सके।
अस्पताल अधीक्षक डॉ.अनुकरण पूर्ति से वार्ता के दौरान रंजन चौधरी ने अस्पताल के आर्थो वार्ड में व्याप्त अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि किस प्रकार चिकित्सीय मनमानी के कारण आर्थो वार्ड में भर्ती मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की इस लचर व्यवस्था पर उन्होंने अस्पताल अधीक्षक से इसमें तत्काल सुधार की मांग की। सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी के सकारात्मक हस्तक्षेप का असर यह हुआ कि अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनुकरण पूर्ति ने इस पर त्वरित पहल की। उन्होंने संबंधित एम्बुलेंस के इंचार्ज और चालक को एम्बुलेंस की साफ-सफाई कर उसे तुरंत जरूरतमंद मरीजों के हितार्थ इसे परिचालन में लाने का निर्देश जारी दिया और आर्थो वार्ड की व्यवस्था में सुधार का सकारात्मक भरोसा भी दिलाया। सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी के इस सार्थक प्रयास से न केवल एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक संसाधन बेशकीमती एम्बुलेंस को कबाड़ होने से बचा लिया गया, बल्कि अस्पताल प्रशासन को उसकी जिम्मेदारियों के प्रति सजग भी किया गया।
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