हजारीबाग के बहिमर गांव में जिस नवजात की चोरी ने सनसनी फैला दी थी, वह वास्तव में माता-पिता की सहमति से रचा गया एक नाटक निकला। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गरीबी और सामाजिक लोक-लाज के डर से परिवार ने खुद ही बच्चे को दूसरे को सौंपा और बाद में इसे चोरी का रूप देकर प्रशासन को गुमराह किया।
छठे बच्चे को जन्म देने वाली बेबी देवी पहले से ही पांच बच्चों के पालन-पोषण और आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। छठे नवजात की जिम्मेदारी उठाने में असमर्थ बेबी देवी ने अपनी सहेली के माध्यम से अपने एक रिश्तेदार को बच्चा स्वेच्छा से सौंप दिया था।
जैसे ही बच्चे के गायब होने की बात गांव में फैली, परिवार को सामाजिक बदनामी का डर सताने लगा। इसी डर को छिपाने के लिए परिजनों ने नवजात चोरी की झूठी कहानी गढ़ दी। देखते ही देखते यह अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई कि किसी अज्ञात ने बच्चे का अपहरण कर लिया है।
इस झूठी खबर से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर भारी हंगामा किया, जिससे इलाके में तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और तकनीकी व मानवीय इनपुट के आधार पर छानबीन शुरू की।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चौपारण से एक महिला को हिरासत में लिया, जिसके पास से बच्चा सकुशल मिल गया। पुलिस ने नवजात को उसकी मां को सौंप दिया है, लेकिन झूठी सूचना फैलाकर माहौल बिगाड़ने और साजिश रचने के आरोप में अब सभी दोषियों के खिलाफ कानूनी जांच की जा रही है।
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