जामताड़ा प्रखंड के किसानों के लिए खुशहाली की नई किरण दिखाई दे रही है। टाटा ट्रस्ट की विशेष पहल ने क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई का स्थायी समाधान निकाल दिया है। अब किसान बिना किसी भारी लागत के सूरज की रोशनी से अपनी खेतों को सींच रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमाने की ओर अग्रसर हैं।
टाटा ट्रस्ट ने जामताड़ा प्रखंड की चार प्रमुख पंचायतों में सोलर प्लांट आधारित सिंचाई प्रणाली स्थापित की है। गोपालपुर पंचायत के गोपालपुर गांव, उदल बनी पंचायत के अमलाचातर और शहरजोड़ी गांव, और तरणी पंचायत के करमा गांव के लगभग 1500 किसान इस योजना से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। इससे करीब 80 एकड़ बंजर और कम सिंचित रहने वाली जमीन अब लहलहाने के लिए तैयार हो गई है। सोलर प्लांट की मदद से किसान अब बड़े पैमाने पर टमाटर, बैगन, हरी मिर्च और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। पहले सिंचाई के लिए किसानों को डीजल पंप या अनियमित बिजली पर निर्भर रहना पड़ता था, जो महंगा और अनिश्चित था। अब किसानों को सिंचाई के खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ रही है। इस पहल से जामताड़ा के स्थानीय बाजारों में अब बाहर से आने वाली सब्जियों के बजाय स्थानीय ताजी सब्जियां उपलब्ध होंगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी इसका रखरखाव मॉडल है। प्रत्येक गांव में 30 से 40 सदस्यों की संचालन कमेटी बनाई गई है। कमेटी में अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष का चयन किया गया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फंड के लिए बैंक में संयुक्त खाता खोला गया है। प्रत्येक लाभार्थी किसान प्रति माह केवल 10 रुपये कमेटी के फंड में जमा करता है। यह राशि भविष्य में सोलर प्लांट में किसी भी तकनीकी खराबी को ठीक करने में इस्तेमाल होगी, ताकि योजना कभी बाधित न हो। इस योजना के लिए उन गांवों का चयन किया गया है जो नदी या ‘जोरिया’ (छोटे नाले) के किनारे बसे हैं। सूरज की रोशनी से चलने वाले पंपों के माध्यम से नदी का पानी सीधे खेतों तक पहुँचाया जा रहा है। यह मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों को आर्थिक निर्भरता से भी मुक्त कर रहा है।
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