झारखंड की जेलों की हालत चिंताजनक होती जा रही है। राज्य की 31 जेलों में से 20 जेलों में जेलर की जिम्मेदारी निम्नवर्गीय लिपिकों के हाथों में है, जो नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, 3 जेलों में कंप्यूटर ऑपरेटर, और 5 में सहायक कारापाल जेलर का प्रभार संभाल रहे हैं। सिर्फ 3 जेलों में ही वास्तविक जेलर तैनात हैं, लेकिन ये भी लिपिक पद से प्रोन्नत होकर बने हैं।
झारखंड जेल मैनुअल 2025 के अनुसार, जेलर और सहायक जेलर जैसे पदों पर वर्दीधारी अधिकारी ही नियुक्त किए जा सकते हैं। मैनुअल के नियम 105, 224 और 225 में स्पष्ट है कि लिपिकीय कर्मचारियों को जेल संचालन का अधिकार नहीं है, न ही वे कैदियों से बातचीत कर सकते हैं। इसके बावजूद, कई जेलों का संचालन ऐसे ही कर्मचारियों के हाथों में है।
झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन ने इस गंभीर अनियमितता पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर ध्यान दिलाया है। संघ के प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिर्की ने बताया कि कक्षपालों के पास स्नातक और तकनीकी डिग्रियां होने के बावजूद उन्हें प्रोन्नति नहीं दी जा रही है, जबकि अनुकंपा या दैनिक भुक्तान वाले लिपिकों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
यहां क्लर्क संभाल रहे जेलर की कुर्सी
केंद्रीय कारा दुमका- अर्चना कुमारी
मंडल कारा सिमडेगा- मोहम्मद युसूफ आज़ाद
मंडल कारा लातेहार- प्रदीप मुंडा
मंडल कारा गढ़वा- मेशाद आलम
मंडल कारा कोडरमा- अभिषेक सिंह
मंडल कारा धनबाद, चतरा, लोहरदगा, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, साकची, रामगढ़, खूंटी, घाटशिला, मधुपुर, राजमहल, बरही, ओपेन जेल हजारीबाग में लिपिक या दैनिककर्मी स्तर के अधिकारी हैं।
जहां कंप्यूटर ऑपरेटर बने जेलर
केंद्रीय कारा डालटनगंज- आशीष कुमार सिन्हा
मंडल कारा चास- निखील पांडेय
मंडल कारा तेनुघाट- नीरज कुमार
जहां सहायक कारापाल को मिला प्रभार
होटवार- देवनाथ राम
घाघीडीह, हजारीबाग, गुमला, सरायकेला- विभिन्न सहायक कारापाल
सिर्फ 3 जेलों में हैं ‘जेलर पदधारी’
केंद्रीय कारा देवघर- प्रमोद कुमार
केंद्रीय कारा गिरिडी- धर्मशीला कुमारी
मंडल कारा चाईबासा- अजय कुमार श्रीवास्तव
Leave a comment