एक तरफ जहां दुनिया ब्रांडेड बोतलबंद पानी की ओर बढ़ रही है, वहीं जामताड़ा जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित जामताड़ा प्रखंड के बरजोरा पंचायत का बमनडीहा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब 400 की आबादी वाला यह गांव भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जहां लोग जोरिया यानी नालों और डोभा का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में कहने को तो पांच चापाकल हैं, लेकिन विडंबना यह है कि सभी वर्षों से खराब पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को बार-बार शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई समाधान नहीं निकला। गांव में न तो कोई सरकारी कुआं है और न ही तालाब। ऐसे में गांव की महिलाएं प्रतिदिन आधा किलोमीटर दूर स्थित जोरिया से बाल्टी में पानी भरकर लाती हैं। ग्रामीण इस दूषित पानी को छानकर और उबालकर पीने को विवश हैं। महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें इसकी आदत हो गई है क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
गांव के निवासी रविंद्र पांडे ने एक कड़वी सच्चाई साझा करते हुए बताया कि यहां राशन नहीं, बल्कि पानी उधार लेना पड़ता है। गांव में केवल एक निजी कुआं है, जिसका जलस्तर लगातार गिर रहा है। स्थिति इतनी विकट है कि यदि रात-बिरात घर में कोई मेहमान आ जाए, तो पड़ोसियों से पानी मांगना पड़ता है। हालांकि इसके लिए पैसे नहीं देने पड़ते, लेकिन अपनी प्यास बुझाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना ग्रामीणों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। आसपास के गांवों में सोलर प्लांट और आधुनिक जल व्यवस्थाएं पहुंच चुकी हैं, लेकिन बमनडीहा आज भी इन कल्याणकारी योजनाओं से अछूता है। ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। डिजिटल और विकसित होते भारत की यह तस्वीर जामताड़ा प्रशासन के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।
Leave a comment