जामताड़ा जिले में आदिवासी समाज को नशा मुक्ति की राह पर ले जाने, शिक्षा का उजियारा फैलाने और अपनी समृद्ध पारंपरिक रीति-रिवाजों को सहेजने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। ‘देश मांझी परगना बाईसी, संथाल परगना की अगुवाई में 10 दिवसीय मांझी परगना प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन रानीगंज नायकी बाबा मोतीलाल मुर्मू, मुख्य सलाहकार सुनील हेम्ब्रम, जामताड़ा जिला प्रभारी मानोतान् जगदीश मुर्मू और देवघर जिला काराम गुरू मानोतान् सर्वेश्वर किस्कू के दिशा-निर्देश में हुआ। आयोजन से पूर्व जामताड़ा प्रखंड के रानीगंज मांझी थान और जाहेर थान में पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना कर खुशहाली की कामना की गई।
आदिवासी समाज को एक नई और बेहतर दिशा
इस कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य समाज को हंड़िया-दारू (स्थानीय शराब) और अन्य गलत गतिविधियों से पूरी तरह दूर करना। आने वाली पीढ़ी को उच्च शिक्षा से जोड़कर आदिवासी समाज का गौरव बढ़ाना। अपनी पारंपरिक व्यवस्था और रीति-रिवाजों को अक्षुण्ण रखते हुए आगे बढ़ना। इस ऐतिहासिक प्रशिक्षण कार्यशाला में न केवल जामताड़ा, बल्कि पड़ोसी जिलों जैसे देवघर, गोड्डा और दुमका से भी बड़ी संख्या में मांझी परगना और सामाजिक अगुआ (अग्रणी नेता) हिस्सा ले रहे हैं। वहीं वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि समाज के विकास के लिए कुरीतियों को छोड़ना और शिक्षित होना अनिवार्य है। यह 10 दिवसीय कार्यशाला आने वाले दिनों में आदिवासी समाज को एक नई और बेहतर दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगी।
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